अमिताभ बच्चन
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अपने ब्लॉग में आगे अमिताभ लिखते हैं, 'सोचते हैं कि अब एक घंटे में नर्स आ जाएंगी, इंजेक्शन के जरिए दवा दी जाएगी, फेफड़ों की जांच होगी, शरीर की जांच होगी। हम जो गेम खेलते हैं, वे ट्रीटमेंट इक्विपमेंट से मुकाबला करते हैं। कितनी सांस ली, कितनी देर सांस रोकी...पिछले दिन की टाइमिंग को पछाड़ना है...बेहतर करना है...लैब रिपोर्ट के पैरामीटर के नंबर पूछते हैं...इसके शब्द समझ नहीं आते और न ही यह समझ आता है कि डॉक्टर्स क्या कह रहे हैं।'