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‘टाइगर जिंदा है’ के तीन साल: ये था सलमान खान का रिएक्शन जब अली ने उनको सुनाया फिल्म का टाइटल

Tue, 22 Dec 2020 11:43 AM IST
Tanuja Yadav अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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फिल्म टाइगर जिंदा है का पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
अपनी नई वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर सुर्खियां बटोर रहे निर्माता निर्देशक अली अब्बास जफर ने हिंदी सिनेमा में बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि से आकर सफलता का एक नया पैमाना स्थापित किया है। उनके खाते में ‘सुल्तान’ और ‘टाइगर जिंदा है’ जैसी 300 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाली फिल्में दर्ज हैं। उनके अलावा ये सफलता सिर्फ निर्देशक राजकुमार हीरानी के खाते में ‘पी के’ और ‘संजू’ के नाम पर दर्ज हैं। 22 दिसंबर को उनकी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ की रिलीज के तीन साल पूरे हो रहे हैं और अली इस मौके पर ये राज खोल रहे हैं कि आखिर फिल्म में जोया का किरदार इतना अहम कैसे बना!
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ali abbas zafar - फोटो : social media
देहरादून से आकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के बावजूद छा जाने वाले अली अब्बास जफर का सफर हिंदी सिनेमा में बतौर निर्देशक अपना करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक नज़ीर है। फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ के रिलीज होने की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर अली कहते हैं, “यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। खासकर इसलिए कि पहली फिल्म ‘एक था टाइगर’ बहुत बड़ी हिट हो चुकी थी। दूसरी बात यह थी कि हमारी फिल्म ‘सुल्तान’ के बाद आ रही थी। ‘सुल्तान’ पर लोगों ने जिस तरह से प्यार बरसाया था, उससे मेरे और आदित्य चोपड़ा के ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई। हम पर दर्शकों के सामने एक ऐसी फिल्म पेश करने का दबाव था, जो ‘एक था टाइगर’ में तय किए गए पैमानों से कई गुना आगे की दिखे।”
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Ali Abbas Zafar - फोटो : Amar Ujala
फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ अपनी पहली फिल्म ‘एक था टाइगर’ से कितनी और किस मायने में अलग रही?, ये पूछे जाने पर वह बताते हैं, “पहली फिल्म मुख्य रूप से एक रोमांस फिल्म थी लेकिन इस बार जब किरदार तय हो गए तो मैंने सोचा कि दूसरे भाग को थोड़ा ज्यादा वास्तविक और हकीकत के करीब होना चाहिए। दुनिया का सामाजिक राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा था। आतंकवाद को लेकर नए वैश्विक समीकरण बन रहे थे और ये सब कुछ फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ की पृष्ठभूमि बन गया। हम एक सत्य घटना से भी प्रेरित थे जिसमें 39 भारतीय नर्सों को एक आतंकवादी गिरोह ने बंधक बना लिया था।”

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ali abbas zafar - फोटो : अमर उजाला
इसी क्रम में अली वह दिन भी याद करना नहीं भूलते जब पहली बार इस फिल्म की पटकथा सलमान खान को सुनाई गई थी। वो कहते हैंं “स्क्रिप्ट तैयार हो जाने के बाद सलमान सर के साथ मेरी बातचीत फिल्म के टाइटल को लेकर शुरू हुई और टाइटल था, टाइगर जिंदा है। जब हमने उनको फिल्म का टाइटल बताया। वह मेरी तरफ देख कर मुस्कुराए। उनकी फिल्मों के नाम ऐसे ही विशाल हुआ करते हैं। फिल्म ‘टाइगर ज़िंदा है’ सलमान खान को उतने ही अद्भुत तरीके से पेश करती है जितना कि कोई उनके बारे में सोच सकता है। जब मैंने उनको कहानी का आइडिया सुनाया तो एक तरह से वह समझ चुके थे कि हम कैसी फिल्म बनाने जा रहे हैं। फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ एकता, शांति, भाईचारा और खुशी के एहसासों से बनी है और एक ब्रांड के तौर पर सलमान खान कहीं न कहीं इन्हीं मूल्यों के पक्ष में खड़े होते हैं।”
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Katrina Kaif, Ali Abbas zafar - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म की हीरोइन कैटरीना कैफ का जिक्र करना अली अब्बास जफर इस दौरान बिल्कुल नहीं भूलते। अली बताते हैं, “फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में कैटरीना कैफ का किरदार जोया बेहद अहम हिस्सा है। कबीर खान ने टाइगर के पहले भाग में कहीं न कहीं एक बेहद दमदार किरदार इस फ्रेंचाइजी में स्थापित कर दिया। ऐसे में मेरे ऊपर जोया के किरदार को नया बनाने की जिम्मेदारी थी। उसका किरदार टाइगर जितना ही स्ट्रॉन्ग होना चाहिए था। आइडिया ये था कि जोया को उसकी खुद की पहचान दी जाए। फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में जोया का किरदार इसीलिए कहानी का अहम हिस्सा तो है ही, वह भावुकता के दृष्टिकोण से भी बहुत असरदार किरदार बन पड़ता है।”
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ali abbas zafar - फोटो : अमर उजाला
अली अब्बास जफर की कहानियों में महिला किरदारों की खास छवि रही है। इसके बारे में अली का मानना है कि ऐसा शायद उनकी परवरिश को लेकर हुआ। इसका श्रेय वह अपनी मां, अपने परिवार की महिलाओं और अपनी दोस्तों को देते हैं। वह खुलासा करते हैं, “जोया का किरदार खड़ा करने के पीछे एकमात्र विचार यही था कि वह हमारे दौर की समकालीन महिला की आवाज बन जाए। जोया यह भी दिखाती है कि उस फील्ड की महिलाएं किस मिट्टी की बनी होती थीं, जहां अपनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें किसी और की जरूरत नहीं पड़ती। मेरे खयाल से वक्त आ गया है कि हम बड़े पर्दे पर महिलाओं की तारीफ करना और उनका जश्न मनाना शुरू कर दें।”
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