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मां के निधन के 15 दिन बाद अक्षय खन्ना ने शुरू किया काम, एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर बोली ये बात

Mon, 31 Dec 2018 11:54 AM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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akshay khanna
बीजेपी सांसद रहे अभिनेता विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना अब एक ऐसी फिल्म में नजर आने वाले हैं, जिस पर बीजेपी की प्रोपेगैंडा फिल्म होने के आरोप लग रहे हैं। अमर उजाला ने एक खास मुकालात में अक्षय से उनकी इस फिल्म के बारे में जानने की कोशिश की । अक्षय ने फिल्म से जुड़े असल किरदारों को निभाने के अनुभव और उनकी कुछ और आने वाली फिल्मों के बारे में बताया।
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akshay khanna
फिल्म एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के लिए हां करने से पहले किन-किन चीज़ों पर गौर किया आपने ?

जिस किताब पर यह फिल्म आधारित है और जिसने यह किताब लिखी है वह पीएमओ में तो काम करता था। वह मनमोहन सिंह को कई सालों से जानता था। बारू के पिताजी नरसिम्हा राव के भाषण लिखते थे और मनमोहन सिंह नरसिम्हा राव को अपना गुरु मानते थे। यह कहानी है कि दो आदमियों के बीच में दोस्ती कैसे बनती है और कैसे टूटती है। तीसरा मुझे वो दुनिया बहुत अच्छी लगी, क्योंकि ये दुनिया हम सबने सिर्फ बाहर से देखी है। चौथा कि मुझे मेरा किरदार बहुत पसंद आया। 
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akshay khanna
इससे पहले भी आप गांधी, माई फादर में एक असल किरदार को परदे पर जी चुके हैं, कितना मुश्किल होता है परदे पर किसी और को जीना?

 मेरे लिए दोनों ही फिल्में आसान इसलिए रहीं क्योंकि हरिलाल गांधी बहुत कम लोगों को मालूम है। संजय बारू जी का जो किरदार है उनके बारे में काफी लोग जानते हैं। लेकिन उस हद तक नहीं जानते हैं कि उनका बोलने का तरीका कैसा है। दूसरी बात ये कि हमारे निर्देशक विजय गुट्टे को ऐसा लगा कि एक ही किरदार है जिसके साथ मैं खेल सकता हूं और मैं अपना कुछ बना सकता हूं। 

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Akshay khanna
विजय ने आपको मना किया था संजय बारू के बारे में जानने के लिए। पर इंसान की फितरत होती है कि जिस चीज़ के बारे में मना किया जाए वह वही करना चाहता है, आपके मन में कोई उत्सुकता रही उनके बारे में अलग से कुछ जानने की?

 नहीं। जब आप अपने निर्देशक पर पूरा विश्वास रखते हो तो पूरा विशवास रखो, आधा मत रखो। मैं शायद बहुत बड़ी बात कर रहा हूं पर मैं यह कह सकता हूं कि विजय गुट्टे में देश को एक अच्छा स्टोरी टेलर, एक अच्छा निर्देशक बहुत समय बाद मिला है।
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अक्षय खन्ना
वैसे सियासी तौर पर आप किसी राजनीतिक दल के समर्थक हैं?

यह मेरा निजी मामला है और मैं इस चीज़ पर बिलकुल भी नहीं जवाब देना चाहता हूं क्योंकि मुझे राजनीति की समझ नहीं है। मैं प्रेस कांफ्रेस में भी कह चुका हूं कि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर की राजनीति को हमें नेताओं के लिए छोड़ देना चाहिए।
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फिल्म मॉम में अक्षय खन्ना का लुक
इसके बाद आने वाली फिल्में कौन सी हैं आपकी?

एक फिल्म है सेक्शन 375 जो कि एक कोर्ट रूम ड्रामा है। ये एक ऐसा कानून है जिस पर हम बहस करना चाहते हैं। संसद में क्या होता है, बहस ही तो होती है। वह कानून को लेकर चीखते हैं चिल्लाते हैं, वह कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। बहस तो समाज में होनी चाहिए।
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