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Ajit Khan: किताबें बेचकर माया नगरी आया था अपने जमाने का यह विलेन, हीरो बनते-बनते ऐसे सफेदपोश खलनायक बन गए अजीत

Sat, 22 Oct 2022 09:14 AM IST
पलक शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अजीत खान - फोटो : social media
'मोना डार्लिंग.............' डायलॉग सुनते ही बॉलीवुड के एक ऐसे दमदार विलेन का चेहरा आंखों के सामने घूमता है, जिसने अपने अभिनय के दम पर वर्षों तक इंडस्ट्री में अपना सिक्का जमा कर रखा था। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के अपने समय के सबसे स्टाइलिश और प्रभावशाली विलेन अजीत खान की। मोना डार्लिंग के साथ-साथ उनका डायलॉग 'सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है...' भी बहुत मशहूर हुआ था। अक्सर फैंस के साथ-साथ इंडस्ट्री के लोग भी उन्हें लॉयन कहकर पुकारते थे। हमेशा अपने अभिनय से लोगों का मनोरंजन करने वाले अजीत खान का जन्म 27 जनवरी 1922 में हुआ था और अभिनेता ने 22 अक्टूबर 1998 में हैदराबाद में अंतिम सांस ली, जिसके मुताबिक आज उनकी पुण्यतिथि है।
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अजीत खान - फोटो : फाइल
अभिनेता अजीत खान का नाम आते ही विलेन के रूप में उनकी एक ऐसी छवि निखरकर आ जाती है, जो उन्होंने अपने पांच दशक के करियर में बड़ी मेहनत से बनाई थी। अजीत हिंदी सिनेमा के ऐसे  खलनायक थे, जो हीरो पर भी भारी पड़ जाया करते थे। उनके डायलॉग बोलने के अंदाज से लेकर उनके कपड़े पहनने के स्टाइल तक सबकुछ सबसे निराला था। जब भी वह पर्दे पर आते थे कमाल कर जाते थे। अजीत खान का जन्म 27 जनवरी 1922 को हैदराबाद के गोलकुंडा में हुआ था। अभिनेता के  बचपन का नाम हामिद अली खान था। अजीत के पिता बशीर अली खान हैदराबाद में निजाम की सेना में काम करते थे। अजीत ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वारंगल जिले के सरकारी जूनियर कॉलेज से पूरी की थी, लेकिन उन्हें दिलचस्पी अभिनय में थी। 
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अजीत
जी हां अजीत खान को भी बचपन से ही अभिनय का शौक था, जिसके कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़ने का ही फैसला कर लिया था। दरअसल, उनपर मुंबई आकर फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का भूत सवार था और यह इस कदर बढ़ गया था कि अजीत ने अपना यह सपना पूरा करने के लिए अपनी किताबें तक बेंच दी थीं। लेकिन जब अजीत मुंबई पहुंचे और यहां की चकाचौंध भरी दुनिया से मुखातिब हुए तो उनका सिर चकरा गया क्योंकि यह दुनिया उनके सपनों से बिल्कुल अलग थी। मुंबई में अपने शुरुआती दिन अजीत ने सीमेंट के पाइप में रहकर गुजारे थे। इतना ही नहीं उनकी भिड़ंत कई बार गुंडों से भी हुई थी। हालांकि कुछ समय बाद अजीत को फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे थे। लेकिन उनको अपने करियर का पहला बड़ा रोल बतौर हीरो साल 1946 में रिलीज हुई फिल्म 'शाह-ए-मिस्र' में मिला था।  
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अजीत
पहली बार इस फिल्म में बतौर हीरो काम करने के बाद अजीत अपने सपनों की दुनिया में आगे बढ़ने लगे थे। इस फिल्म में मिली प्रशंसा के बाद उन्होंने कई फिल्मों में बतौर हीरो काम किया था। इतना ही नहीं अजीत को उस समय के सभी मशहूर अभिनेत्रियों के साथ काम करने का मौका भी मिला था। लेकिन जब अपनी बढ़ती उम्र में हीरो तौर पर अपने अंतिम पड़ाव पर थे, तभी उनकी किस्मत ने एक बार और पलटी मारी। दरअसल, साल 1966 में उन्हें फिल्म 'सूरज' में खलनायक का किरदार ऑफर हुए, जिसने एक बार फिर उन्हें इंडस्ट्री में टिके रहने का जज्बा दिया। साल 1973 उनके करियर का एक अहम पड़ाव साबित हुआ था क्योंकि उस साल उनकी कई फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इन फिल्मों में  जंजीर, यादों की बारात, समझौता, कहानी किस्मत की और जुगनू जैसे नाम शामिल थे। इन सभी फिल्मों में उन्होंने बतौर विलेन काम किया था।
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अजीत
अजीत ने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। लेकिन 22 अक्टूबर 1998 को उन्होंने इस रंगीन दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। इसी दिन अजीत ने हैदराबाद में अंतिम सांस ली थी। बॉलीवुड में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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