durga khote
दुर्गा अपने बेटों के साथ ससुराल में रहती थीं लेकिन कुछ समय बाद दुर्गा को लगने लगा कि उन्हें खुद ही कुछ काम करने की जरूरत है। वो पढ़ी-लिखी थीं इसलिए पैसे कमाने के लिए उन्होंने सबसे पहले ट्यूशन का सहारा लिया। फिर एक दिन उन्हें फिल्म ‘फरेबी जाल’ में काम करने का प्रस्ताव मिला। ये वो दौर था जब बोलती फिल्मों की शुरुआत हुई थी। पैसों की मजबूरी के चलते दुर्गा ने रोल स्वीकार किया। फिल्म में दुर्गा का रोल महज दस मिनट का था, जिसके कारण उन्हें फिल्म की कहानी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। फिल्म रिलीज हुई तो खराब कंटेंट की वजह से दुर्गा को सामाजिक आलोचना का सामना करना पड़ा।