pavel Gulati
- फोटो : Mumbai, Amar Ujala
पावेल को फिल्म थप्पड़ से शोहरत मिली है। लेकिन, यहां तक आने में उन्हें 14 साल लगे हैं तो क्या समझा जाए कि वनवास पूरा हुआ और अब राज तिलक का समय है?
पावेल ठट्ठा मारकर पहले तो हंसते हैं फिर कहते हैं, “हां, कह सकते हैं कि अब राजतिलक की बारी है। मैं 2006 में मुंबई आया था। व्हिसलिंग वूड्स में ही पढ़ाई के दौरान नसीरुद्दीन शाह से मिलना हुआ फिर कॉलेज के बाद उन्हीं के साथ हो लिया। नसीर साहब की बदौलत ही मैं जो कुछ हूं वह बन पाया हूं।”