आलोक पांडे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लड़का हीरो बनना चाहता है, सुनकर पिताजी की क्या प्रतिक्रिया रही?
हम चार भाई हैं, सबसे छोटा मैं ही हूं। तीनों भाई अब भी गांव में खेती बाड़ी करते हैं। जब मैं थियेटर कर रहा था तो पिताजी कहा करते थे कि नाटक में क्या रखा है? पढाई पर ध्यान दो, लेकिन कभी उन्होंने कोई काम पर पाबंदी नहीं लगाई। वह कहा करते थे कि कुछ करना है करो, लेकिन एक बात ध्यान में रहे कि तुम्हे अपना भविष्य खुद सोचना है। जब मुंबई आया तो मेरे सभी भाइयो ने बहुत सहयोग किया। पिताजी शिवराम पांडे भी किसान रहे। कभी कभार पैसे भेज दिया करते थे। अभी बीते साल वह हमें छोड़कर गोलोक वासी हो गए।