यूपी की रामपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान ने बीजेपी की जया प्रदा को काफी पीछे छोड़ दिया है। सपा से पहले जया प्रदा आरएलडी के टिकट पर भी चुनाव हार चुकी हैं। इस बार जया प्रदा को भाजपा की टिकट भी रामपुर से जिता न सकी। 1980 के बाद से कोई ऐसा इलेक्शन नहीं है, जिसमें आजम खान की सक्रिय भागीदारी न रही हो। हालांकि अभी रुझान ही आए हैं लेकिन जया का हारना लगभग तय माना जा रहा है। हमेशा की तरह जया का साथ देने वाले अमर सिंह का उनकी हार पर अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। हाालंकि अमर और जया के रिश्तों के बारे में चर्चा लगातार राजनीति में बनी रहती है। जानिए, जया प्रदा और अमर सिंह के बीच क्या है रिश्ता?
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jaya prada and amar singh
माना जाता है कि जया प्रदा को पार्टी में लाने के पीछे अमर सिंह की बड़ी भूमिका थी। जया प्रदा भी अमर सिंह को दोस्त और राजनीतिक गुरु मानती रही हैं। जया प्रदा ने खुद बताया था कि किस तरह लोगों ने उनका और अमर सिंह का नाम जोड़ा। अमर सिंह के साथ लिंकअप को लेकर एक बार जया प्रदा ने कहा था- मैं अमर सिंह को अपना 'गॉडफादर' मानती हूं हालांकि मैं उन्हें राखी भी बांध दूं, तब भी मेरे उनके बारे में बाते बनाना बंद नही करेंगे।
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jaya prada, amar singh
एक अन्य मौका तब सामने आया जब जया प्रदा ने बताया कि 'मेरे जीवन में कई लोगों ने मेरी मदद की है। अमर सिंह उनमें से एक थे। बात उस वक्त की है जब अमर सिंह डायलिसिस पर थे और उनके साथ मेरी तस्वीरों को गलत तरीके से फैलाया गया। मैं रो रही थी और कह रही थी कि अब मुझे और नहीं जीना है, मैं आत्महत्या करना चाहती हूं। डायलिसिस से आने पर सिर्फ अमर सिंह जी मेरे साथ खड़े हुए, मेरा समर्थन किया।' बता दें कि जया प्रदा ने साल 2009 चुनाव में आजम खान पर अश्लील तस्वीरें फैलाने का आरोप लगाया था।
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अमर सिंह और जयाप्रदा पूजन करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल अक्टूबर में ही अमर सिंह ने भी 'मी टू' को लेकर फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा और यूपी के पूर्व मंत्री आजम खां पर ऐसी बात कह दी थी, जिस पर बखेड़ा खड़ा हो गया था। नेताओं पर लग रहे आरोपों को लेकर अमर सिंह ने कहा कि अगर फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा 'मी टू' कह दें तो आजम खां को जेल जाना पड़ सकता है। इसके बाद बोले, 'मी टू' मामलों की सही जांच के बाद कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे तो कोई मुझे भी फंसा सकता है।
बहरहाल, करियर की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद जया प्रदा ने राजनीति की ओर रुख किया था। जया प्रदा 1994 में तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हो गईं। साल 2000 में वो तेदेपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं। माना जाता है कि जया प्रदा को पार्टी में लाने के पीछे अमर सिंह की बड़ी भूमिका थी। जब अमर सिंह समाजवादी पार्टी से अलग हुए तो जया भी उनके साथ अलग होकर राष्ट्रीय लोकदल पार्टी में शामिल हो गईं और चुनाव हार गईं। अब वह भाजपा में शामिल हो गई हैं और रामपुर सीट से लगभग चुनाव हार चुकी हैं।