फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'डायलॉग किंग' भी थे 'कॉमेडी किंग' कादर खान, अमिताभ को भी बनाया 'मुकद्दर का सिकंदर'

Sun, 31 May 2020 09:51 PM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
kader khan
बॉलीवुड में वैसे कई मल्टी टैलेंटेड अभिनेता हैं। लेकिन बॉलीवुड में एक अभिनेता ऐसे भी थे, जो शानदार एक्टिंग के साथ ही बेहद ही बेहतरीन डायलॉग्स भी लिखते थे। ये अभिनेता थे कादर खान। जिन्होंने कई फिल्मों के संवाद को अमर कर दिया। कादर खान ने अग्निपथ, सरफरोश, मुकद्दर का सिकंदर और कुली जैसी बेहतरीन फिल्मों के डायलॉग्स लिखे हैं। ये डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इस पैकेज में बताएंगे कादर खान के लिखे हुए 10 बेहतरीन डायलॉग्स...
विज्ञापन

2 of 6
kader khan - फोटो : ट्विटर
मुकद्दर का सिकंदर (1978)
फकीर बाबा बने कादर खान जिंदगी का मर्म अमिताभ को समझाते हैं, 'सुख तो बेवफा है आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है। दुख को अपना ले तब तकदीर तेरे कदमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा।'

कुली (1983)
अमिताभ के किरदार में जान डालने वाले संवाद कादर ने ही लिखे थे, 'बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है 'इकबाल'।'
विज्ञापन

3 of 6
kader khan govinda
हिम्मतवाला (1983)
फिल्म में अमजद खान के हंसोड़ मुंशी का किरदार निभाने वाले कादर को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन का फिल्मफेयर मिला था। फिल्म में वो कहते हैं, 'मालिक मुझे नहीं पता था कि बंदूक लगाए आप मेरे पीछे खड़े हैं। मुझे लगा, मुझे लगा कि कोई जानवर अपने सींग से मेरे पीछे खटबल्लू बना रहा है।'

मिस्टर नटवरलाल (1979)
अमिताभ ने भगवान से बात करते हुए कहा था, 'आप हैं किस मर्ज की दवा, घर में बैठे रहते हैं, ये शेर मारना मेरा काम है? कोई मवाली स्मग्लर हो तो मारूं मैं शेर क्यों मारूं, मैं तो खिसक रहा हूं और आपमें चमत्कार नहीं है तो आप भी खिसक लो।'

4 of 6
kader khan - फोटो : social media
अंगार (1992)
नाना पाटेकर और जैकी श्रॉफ की इस फिल्म के डायलॉग के लिए कादर खान को सर्वश्रेष्ठ संवाद का फिल्मफेयर मिला था। इसका एक संवाद है, 'ऐसे तोहफे (बंदूकें) देने वाला दोस्त नहीं होता है, तेरे बाप ने 40 साल मुंबई पर हुकूमत की है इन खिलौनों के बल पर नहीं, अपने दम पर।'

सत्ते पे सत्ता (1982)
अमिताभ के शराब पीने वाले सीन को यूट्यूब पर काफी हिट मिले हैं। इसमें वो कहते हैं, 'दारू पीता नहीं है अपुन, क्योंकि मालूम है दारू पीने से लिवर खराब हो जाता है, लिवर।'
विज्ञापन

5 of 6
kader khan amitabh bachchan
अग्निपथ (1990)
अमिताभ के इस किरदार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला इसमें बड़ा हाथ जानदार संवादों का भी था, जो कादर ने ही लिखे थे, 'विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है।'

बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990)
चालाक ठग का किरदार निभाने वाले कादर का एक मशहूर सीन, 'तुम्हें बख्शीश कहां से दूं, मेरी गरीबी का तो ये हाल है कि किसी फकीर की अर्थी को कंधा दूं तो वो उसे अपनी इंसल्ट मान कर अर्थी से कूद जाता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
kader khan
हम (1991)
कादर खान का इस फिल्म में डबल रोल था और आर्मी कर्नल के किरदार में यह डायलॉग उन्होंने बोले थे, 'कहते हैं किसी आदमी की सीरत अगर जाननी हो तो उसकी सूरत नहीं उसके पैरों की तरफ देखना चाहिए, उसके कपड़ों को नहीं उसके जूतों की तरफ देख लेना चाहिए।'

जुदाई (1997)
अनिल कपूर और श्रीदेवी अभिनीत इस फिल्म में परेश रावल सवाल पूछने वाले किरदार बने हैं लेकिन कादर खान उन्हें अपनी पहेलियों से छका देते हैं। 'इतनी सी हल्दी, सारे घर में मल दी, बताओ किसकी सरकार बनेगी?'

पढ़ें: Nargis Dutt: पहली मुलाकात में नरगिस से बात भी नहीं कर पाए थे सुनील दत्त, ऐसे शादी में तब्दील हुई ये लवस्टोरी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें