“जलाने वाले जलाते ही हैं चराग आखिर, ये क्या कहा कि हवा तेज है जमाने की” यह शेर 60 के दशक की अभिनेत्री बीना राय के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठता है। उनके फिल्मों में आने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। लोग अपनी बड़ी-बड़ी मांगे मनवाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठते हैं, लेकिन अभिनेत्री को अभिनय से इतना प्यार था कि वह फिल्मों में काम करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गईं। बीना को अनारकली (1953), घूंघट (1960), ताज महल (1963) जैसी कई शानदार फिल्मों के लिए सराहा जाता है।
13 जुलाई 1931 को बीना राय का जन्म लाहौर में हुआ। उनके पिता कृष्णा सरीन रेलवे में अधिकारी थे। अभिनेत्री ने लाहौर से ही अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद वह अपने परिवार के साथ कानपुर आकर बस गईं। इसके बाद उन्होंने भारत से ही आगे की पढ़ाई पूरी की। अभिनेत्री ने कॉलेज के दौरान ही थिएटर में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। अपनी खूबसूरती और अदाकारी के चलते वह कॉलेज में भी काफी मशहूर हुईं।
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