Bina Rai Death Anniversary: आज 60 के दशक की मशहूर अभिनेत्री बीना राय की 16वीं डेथ एनिवर्सरी है। बीना अपने जमाने की शानदार अदाकारा थीं। उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। अभिनेत्री के फिल्मों में एंट्री लेने की कहानी काफी दिलचस्प है। आइए आज जानते हैं कि कैसे भूख हड़ताल पर बैठ कर अभिनेत्री ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा…
“जलाने वाले जलाते ही हैं चराग आखिर, ये क्या कहा कि हवा तेज है जमाने की” यह शेर 60 के दशक की अभिनेत्री बीना राय के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठता है। उनके फिल्मों में आने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। लोग अपनी बड़ी-बड़ी मांगे मनवाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठते हैं, लेकिन अभिनेत्री को अभिनय से इतना प्यार था कि वह फिल्मों में काम करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गईं। बीना को अनारकली (1953), घूंघट (1960), ताज महल (1963) जैसी कई शानदार फिल्मों के लिए सराहा जाता है।
13 जुलाई 1931 को बीना राय का जन्म लाहौर में हुआ। उनके पिता कृष्णा सरीन रेलवे में अधिकारी थे। अभिनेत्री ने लाहौर से ही अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद वह अपने परिवार के साथ कानपुर आकर बस गईं। इसके बाद उन्होंने भारत से ही आगे की पढ़ाई पूरी की। अभिनेत्री ने कॉलेज के दौरान ही थिएटर में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। अपनी खूबसूरती और अदाकारी के चलते वह कॉलेज में भी काफी मशहूर हुईं। Pushpa 2 Dialogues: आखिर क्या है ये रप्पा-रप्पा? पढ़ें अल्लू अर्जुन स्टारर पुष्पा-2 के 10 जबरदस्त डायलॉग्स
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बीना राय
- फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
जिद के आगे टेके घरवालों ने घुटने
बीना राय अपनी खूबसूरती जिद और अदाकारी के लिए पहचानी जाती हैं। अपने कॉलेज के दिनों में एक दिन उन्हें अखबार में एक विज्ञापन दिखा, जिसमें फिल्ममेकर किशोर साहू अपनी नई फिल्म के लिए हीरोइन तलाश रहे थे। इसका चयन एक प्रतियोगिता के जरिए होना था। यह विज्ञापन देखते ही बीना की आंखें चमक उठीं और वह घर पहुंच गईं। घरवालों से उन्होंने कहा कि उन्हें हीरोइन बनने के लिए मुंबई जाने दें। घरवालों ने बीना की इस मांग को ठुकरा दिया, क्योंकि उस दौर में हीरोइन का काम करने वालों को असभ्य पेशा माना जाता था। बीना जिद पर अड़ गईं कि उन्हें मुंबई जाने दिया जाए, लेकिन उनके पिता नहीं माने। अंत में वह भूख हड़ताल पर बैठ गईं और परिवार वालों को उनकी जिद माननी पड़ी।
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बीना राय
- फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
ऐसे मिली पहली फिल्म में एंट्री
घरवालों से मुंबई जाने की इजाजत मिलने के बाद बीना राय ने प्रतियोगिता में भाग लिया और उन्होंने जीत हासिल की। जीतने के बाद अभिनेत्री को 25 हजार रुपये मिलें, जो कि उस समय काफी बड़ी रकम थी। इस जीत के साथ अभिनेत्री को उनकी पहली फिल्म ‘काली घटा’ मिली।
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बीना राय और प्रेमनाथ
- फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
पहली फिल्म में ही इस अभिनेता पर दिल हार बैठीं बीना
अपनी पहली फिल्म की शूटिंग होने से पहले ही अभिनेत्री का सेट पर आना-जाना शुरू हो गया था। इस दौरान उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेता प्रेमनाथ से हुई। उस दौरान प्रेमनाथ का नाम मधुबाला से जुड़ा हुआ था। हालांकि, प्रेमनाथ के घरवालें मधुबाला को अपनाने के लिए तैयार नहीं थे। इस बीच उनकी जिंदगी में बीना की एंट्री हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोनों के बीच प्यार ने इस कदर बेकरारी पैदा की अपनी पहली फिल्म की रिलीज के दिन 13 जुलाई 1951 को ही अभिनेत्री ने प्रेमनाथ से सगाई कर ली और उसके अगले ही साल 2 सितंबर 1952 को शादी।
बीना राय और मधुबाला का कनेक्शन
कहा जाता है कि जब मधुबाला ने प्रेमनाथ और बीना राय की शादी की खबर सुनी तो उनकी तबियत बिगड़ गई थी। बीना राय और मधुबाला दोनों ही प्रेमनाथ से प्यार करती थीं। हालांकि, प्रेमनाथ अभिनेत्री बीना के हिस्से में आए। बीना और मधुबाला दोनों ने ही अपने करियर में ‘अनारकली’ की शानदार भूमिका निभाई है। साल 1953 में ‘अनारकली’ फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म में बीना राय ने अनारकली की भूमिका अदा की, जिसके लिए उन्हें खूब तारीफे मिलीं। इसके कुछ वर्षों बाद ‘मुगल-ए-आजम’ बनाई गई। इस फिल्म में अनारकली की भूमिका के लिए एक बार फिर बीना से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इसे करने से इनकार कर दिया। बाद में इस भूमिका को मधुबाला ने निभाया। यह फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई की अब मधुबाला को ‘अनारकली’ के किरदार के लिए जाना जाने लगा। Pushpa 2 The Rule Review: पुष्पा 2 की ये रही सबसे कमजोर कड़ी, अर्जुन का अभिनय, सुकुमार का निर्देशन अव्वल नंबर