सोहागन बना द सजना हमार, सुनील बूबना
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फिल्म का आधा बजट तो कलाकार ले जाते हैं
हिंदी से लेकर तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम तक सिनेमा के विकास की सबसे अहम वजह रही है, इनके कलाकारों की फिल्म निर्माण में रुचि रखना। उन्होंने अपने स्टूडियो खोले। अपना पैसा लगाकर सिनेमा बनाया। जनता का मनोरंजन किया और सैकड़ों परिवार भी चलाए। भोजपुरी के सितारों का सिनेमा से नहीं अपनी फीस से लगाव रहा है। 'सोहागन बना द सजना हमार' जैसी कई भोजपुरी फिल्मों का निर्माण कर चुके निर्माता सुनील बूबना इस बारे में बात करने पर कहते है, 'भोजपुरी के पुनरुत्थान के दौर में जिन दो तीन लोगों ने भोजपुरी फिल्मों का निर्माण शुरू किया उनमें मैं भी था। भोजपुरी फिल्मों के निर्माण के साथ साथ उसका डिस्ट्रीब्यूशन मैं खुद ही पूरे भारत में करता था। उस समय जी पी सिप्पी, दिलीप कुमार, भाग्यश्री, निर्मल जानी जैसे लोगों ने भोजपुरी फिल्मों का निर्माण किया। लेकिन, कलाकारों की फीस की वजह से फिल्म का बजट बढ़ता गया। जितने भी हिंदी के अच्छे और बड़े निर्माता भोजपुरी में आएस उनके पास उतना समय नहीं होता था कि वे डिस्ट्रीब्यूशन पर ध्यान दें। और, डिस्ट्रीब्यूटर के एकाउंट में बराबर हिसाब नहीं मिलता था और एकमुश्त राशि में बेच देने से कमाई नहीं दिखती थी। इसी के चलते ये सब भोजपुरी सिनेमा से दूर हो गए।'