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Akshara Singh: 'महिला को दउरा उठाकर घाट जाने की रस्म क्यों नहीं?', छठ को लेकर सवाल कर चर्चा में आईं अक्षरा

Sat, 02 Nov 2024 05:48 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

अक्षरा सिंह अपनी अदाकारी और गायन से लाखों दिलों पर राज करती हैं। हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से वह सुर्खियों आ गई हैं।
 
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अक्षरा सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम- अक्षरा सिंह
अक्षरा सिंह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कई सुपरहिट फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वह काफी ज्यादा सक्रिय रहती हैं और अपनी बातों को बेबाकी से लोगों के सामने रखने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक ऐसी पोस्ट की है, जिसकी वजह वह चर्चा में आ गई हैं।
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अक्षरा सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम- अक्षरा सिंह
अक्षरा ने साझा की सादगी भरी तस्वीर
अभिनेत्री की यह पोस्ट छठ के त्योहार को लेकर है। इसमें उन्होंने इस पर्व और महिलाओं को लेकर सवाल किया है। अक्षरा ने अपनी तस्वीर साझा करते हुए सवाल किया है कि महिलाएं छठ का दउरा क्यों नहीं उठा सकती है? इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीर में वह बिना मेकअप की नजर आ रही हैं। 
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अक्षरा सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम- अक्षरा सिंह
सोशल मीडिया पर पूछा यह सवाल
पीले रंग के सलवार सूट में अभिनेत्री बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आ रही हैं। साथ ही, उन्होंने अपने सिर पर टोकरी भी रखी हुई है। अभिनेत्री ने फोटो के कैप्शन में लिखा, "'बनऽ न कवन देव कहरीया , दउरा घाटे पहुंचाय' ना जाने कितने साल से छठ का ये पारंपरिक गीत गाया जाता है और जब जब मैं इस गीत कि यह पंक्ति सुनती हूं तो मन में यह ख्याल आता है की जो महिला छठ पूजा के प्रत्येक रस्म को (खरना से समाप्ति तक) इतनी श्रद्धा और मेहनत से तीन दिन उपवास रखकर करती है ……उसी महिला को अपने माथ पे दउरा उठाकर घाट जाने की रस्म क्यों नहीं है? 

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अक्षरा सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम- अक्षरा सिंह
पहली बार छठ कर रही अक्षरा
उन्होंने आगे लिखा, "क्यों कोई देव ही कंहरीया बने कोई दवी क्यों नहीं हो सकती ? एक बेटी होने के नाते मेरी हथजोड़ी है की बदलते परिवेश में हमारा समाज इस पर विचार करे कि जिस घर में बेटा नहीं क्या वहां छठ नहीं हो सकता? और यह विचार इसलिए भी प्रबल हुआ क्युकी पहली बार मैं भी छठ कर रही हूं। छठी मईया की जय।"
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अक्षरा सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम- अक्षरा सिंह
लोग दे रहे प्रतिक्रियाएं
अभिनेत्री की इस पोस्ट पर लोग जमकर प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "बिल्कुल अब बेटी और बेटे में कोई अंतर नहीं रह गया है...जो रस्म बेटा पूरा कर सकता है, वह बेटी भी कर सकती है। इस पर बेटी को ही सोचना होगा।" दूसरे यूजर ने लिखा, "अक्षरा जी मेरी मम्मी दउरा उठाती हैं और अकेले घाट पर ले जाती हैं। वह मेरे लिए छठ करती हैं।" इसके अलावा और भी बहुत से यूजर्स अक्षरा की इस बात का समर्थन करते नजर आए।
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