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Apna Adda 29: अभिनय और गालों के डिंपल पापा से विरासत में मिले, पता ही नहीं था कि एक्टिंग के स्कूल भी होते हैं

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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अगर ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘स्त्री 2’ आपने देखी है तो फिल्म का वो पहला सीन जरूर याद होगा जिसमें सिरकटा उस लड़की को उठा ले जाता है जो घर से बाहर आकर गली में सिगरेट पी रही होती है। ‘अपना अड्डा’ सीरीज में इस बार बात इन्हीं अभिनेत्री श्रुति पांडे की। बनारस में ननिहाल है और भोपाल से अभिनय सीखा है। पहली नौकरी की एक न्यूज चैनल में और अब खुद सुर्खियों में हैं अपनी नई फिल्म ‘रेड 2’ के लिए। मिलिए अमेय पटनायक की भरोसेमंद साथी गीता देवी उर्फ श्रुति पांडे से। 
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अजय देवगन के साथ श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
श्रुति, फिल्म रेड 2’ में आपके दीवार तोड़ने वाले सीन की खूब तारीफ हो रही है। क्या सीआईडी वाले दया से इसकी प्रेरणा ली गई?
(हंसते हुए) नहीं, ये तो पता नहीं लेकिन ये सीन शूटिंग के आखिरी दिन का आखिर शॉट है। स्क्रिप्ट में शायद था नहीं लेकिन सबने कहा कि तोड़ दो दीवार और मैंने भी एक्शन डायरेक्टर का साथ पाकर जोश में ये कर दिया।  

 
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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अजय देवगन की किसी फिल्म में किसी सहायक कलाकार को इतनी तारीफ मिल रही हो, ये अपने आप में बड़ी बात है..
इस फिल्म में काम करना भी संयोग ही रहा। पहले मेरा ऑडिशन एक बहुत छोटे रोल के लिए था जिसमें मुझे सिर्फ दो दिन काम करना था। फिर मेरा ऑडीशन देखकर निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने मुझे गीता का किरदार दिया। पूरी फिल्म में मौजूद रहे इस किरदार को देख मेरे घरवाले, रिश्तेदार और परिचित सभी खूब खुश हैं और लगातार बधाई संदेश भेज रहे हैं। 

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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपसे पहले आपके घर में कभी किसी ने अभिनय के बारे में सोचा था क्या?
मेरे पिता लॉन्स नायक एस सी पांडे अब तो रिटायर हो चुके हैं, लेकिन बताते हैं कि अपनी जवानी के दिनों में वह भी हीरो बनने मुंबई आए थे। मेरे गालों के डिंपल और अभिनय को लेकर दीवानगी दोनों उन्हीं से विरासत में मिले हैं। वह अब रायपुर (छत्तीसगढ़) में रहते हैं।
 
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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, आपको अभिनय का चस्का कैसे लगा?
मैंने स्नातक करने के बाद वहीं भिलाई, छत्तीसगढ़ में एक न्यूज एंकर की नौकरी की थी। संयोग देखिए कि मुझे फिल्म ‘हेलमेट’ में पहला ब्रेक जो मिला उसमें भी मैंने एक न्यूज एंकर का ही रोल किया है। न्यूज एंकर की नौकरी के दौरान ही मुझे पता चला कि अभिनय सिखाया भी जाता है और एक्टिंग के स्कूल भी होते हैं। पता करते करते मैं भोपाल के ड्रामा स्कूल आ गई। वहां कोर्स खत्म करके मुंबई आई और तब से काम अच्छा चल रहा है। 
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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हां, स्त्री 2’ के पहले ही सीन में जिस सिगरेट पीती लड़की को सिरकटा ले जाता है, वह भी तो आप ही हैं?
जी हां, शायद वहीं से मेरी पहचान बननी शुरू हुई है। एक बिंदास लड़की को छोटे शहरों में अब भी उतनी छूट नहीं है। फिल्म की विलेन दरअसल पितृसत्तात्मक सोच है और कानपुर से आए निर्देशक अमर कौशिक ने इसे बहुत ही संजीदगी से बिना कोई उपदेश दिया अपनी फिल्म में ढाल दिया है। वह बहुत कमाल के निर्देशक हैं। 
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श्रुति पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बनारस में आपका बचपन बीता है, अब जाना होता है वहां?
अरे, क्यों नहीं। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास जो कालिका देवी मंदिर है, और उसके पास की जो गली है, वही हमारा ननिहाल है। ननिहाल के ही सारे लोग इस मंदिर की देखभाल करते हैं। मुझ पर बाबा के साथ साथ कालिका देवी का भी खूब आशीर्वाद रहा है। मैं जैसे ही मौका मिलता है बनारस जरूर जाती हूं और वहां के पकवानों का खूब आनंद लेती हूं। 

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