Aankhon Ki Gustaakhiyan Day 4 Box office Collection: विक्रांत मैसी और शनाया कपूर की फिल्म आंखों की गुस्ताखियां बॉक्स ऑफिस पर रेंग-रेंगकर चल रही है। चौथे दिन फिल्म ने कितना कलेक्शन किया है, चलिए आपको बताते हैं।
बॉलीवुड में नई पीढ़ी के सितारों की एंट्री हमेशा चर्चा का विषय रही है और जब किसी स्टारकिड का डेब्यू हो, तो उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ जब संजय कपूर और महीप कपूर की बेटी शनाया कपूर अपनी पहली फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ के साथ सिल्वर स्क्रीन पर नजर आईं। लेकिन दर्शकों की उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म की परफॉर्मेंस उतनी ही फीकी साबित हुई।
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'आंखों की गुस्ताखिायां' बॉक्स ऑफिस
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म ने की धीमी शुरुआत
इस फिल्म को लेकर प्रचार जोर-शोर से किया गया था, लेकिन थिएटर में इसकी शुरुआत बेहद धीमी रही। पहले दिन का कलेक्शन महज 30 लाख रहा, जो कि किसी भी लिहाज से काफी निराशाजनक आंकड़ा था। शनिवार को मामूली उछाल के साथ 49 लाख का कलेक्शन दर्ज किया गया। रविवार को भी फिल्म दर्शकों को खींचने में विफल रही।
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'आंखों की गुस्ताखिायां' बॉक्स ऑफिस
- फोटो : सोशल मीडिया
चौथे दिन फिल्म का कलेक्शन
चौथे दिन सोमवार को यानी वर्किंग डे पर फिल्म की कमाई में और भी गिरावट देखी गई। सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को फिल्म ने सिर्फ 15 लाख के आस-पास की कमाई की है। इस तरह चार दिन में कुल कलेक्शन 1.45 करोड़ के करीब पहुंचा है, जो कि 50 करोड़ के बजट वाली फिल्म के लिए बड़ा झटका है।
'आंखों की गुस्ताखिायां' बॉक्स ऑफिस
- फोटो : सोशल मीडिया
सुपरमैन और मालिक ने छीना दर्शकों का ध्यान
फिल्म की कमजोर कहानी और अभिनय के चलते ‘आंखों की गुस्ताखियां’ को सिनेमाघरों में पहले दिन से ही भारी कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ा। उसी दिन राजकुमार राव की ‘मालिक’ और हॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सुपरमैन’ भी रिलीज हुई थीं। जहां एक तरफ ‘सुपरमैन’ ने मल्टीप्लेक्स दर्शकों को अपनी ओर खींचा, वहीं ‘मालिक’ ने कुछ खास कमाल नहीं किया। हालांकि इस मुकाबले में शनाया और विक्रांत मैसी की ये प्रेमकहानी सबसे पीछे रही।
'आंखों की गुस्ताखिायां' बॉक्स ऑफिस
- फोटो : सोशल मीडिया
न कहानी असरदार, न अभिनय प्रभावी
फिल्म की कहानी एक अंधे युवक और एक लड़की के इमोशनल रिश्ते पर आधारित है, जहां लड़की खुद को अंधों की दुनिया समझने के लिए आंखों पर पट्टी बांधकर जीवन जीने की कोशिश करती है। विक्रांत मैसी जैसे अनुभवी कलाकार से दर्शकों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनका किरदार न तो स्क्रिप्ट की वजह से गहराई पा सका, न ही शनाया का डेब्यू इमोशनल कनेक्शन बना पाया। दोनों के अभिनय में नयापन और ईमानदारी की कमी ने फिल्म को कमजोर बना दिया।