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World Teachers Day: कौन थीं देश की पहली महिला शिक्षक?

Sat, 05 Oct 2019 11:41 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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savitribai phule - फोटो : twitter
आज 5 अक्तूबर यानी अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस है। दुनियाभर में लोग अपने शिक्षकों को याद कर रहे हैं। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उस महिला के बारे में, जिन्हें देश की पहली महिला शिक्षक के रूप में जाना जाता है। जो आज भी एक मिसाल बनकर आज भी हमारे दिल में जिंदा हैं। उनका नाम सामने आते ही सिर फक्र से ऊंचा उठा जाता है। उनका नाम है सावित्री बाई फुले।

शिक्षा में अतुलनीय योगदान के लिए देश और समाज सावित्री बाई फुले का सदैव ऋणी रहेगा। जिस समय फुले ने शिक्षा की ज्योत जलाई, उस समय लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, इसके बावजूद भी उन्होंने नारी शिक्षा का बीड़ा उठाया और उसे अंजाम तक पहुंचाया। जिसके बाद समाज से कुंठित वर्ग की महिलाएं भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आगे आने लगीं।
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v - फोटो : social media
बात 19वीं सदी की है, जब स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर किसी भी महिला की आवाज नहीं उठती थी। पर सावित्री बाई फुले ने उस वक्त अपनी आवाज उठाई और नामुमकिन को मुमकिन करके दिखाया।  
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v - फोटो : social media
कौन थीं सावित्रीबाई फूले-
जनवरी 1831 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित नायगांव नामक छोटे से गांव में सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था। उनकी शादी 9 साल की उम्र में ही ज्योतिबा फुले के साथ हो गई थी। बता दें कि जब उनका विवाह हुआ तब वह अनपढ़ थी। उनके पति तीसरी कक्षा तक पढ़े थे।

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savitribai phule - फोटो : social media
सावित्रीबाई का सपना था उच्च शिक्षा ग्रहण करना। पर उस वक्त दलितों के साथ काफी भेद-भाव होता था। इतिहासकार बताते हैं कि एक दिन फूले को अंग्रेजी की किताब के पन्ने पलटते हुए उनके पिताजी ने देख लिया। सावित्री के पास आए और किताब छीनकर बाहर फेंक दी। सावित्री को समझ नहीं आया। 
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savitribai phule - फोटो : social media

उन्होंने अपने पिताजी से जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि पढ़ाई करने का हक केवल उच्च जाति के पुरुषों का है। उस वक्त दलितों के साथ महिलाओं के लिए भी पढ़ाई करना पाप था। इस घटना के बाद सावित्रीबाई ने प्रण किया कुछ भी हो जाए वह शिक्षा जरूर ग्रहण करेंगी। अपने इस प्रण को उन्होंने कोशिशों के दम पर पूरा भी किया।

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