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Meeting Tips: ऑफिस में संवाद बनाए रखना क्यों है जरूरी? बातचीत से बढ़ती है समझ, मीटिंग से मिलते हैं नए आइडिया

Sat, 14 Mar 2026 11:09 AM IST
Shahin Praveen एलिजाबेथ त्रिन्ह, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Harvard Business Review: ऑफिस में होने वाली मीटिंग सिर्फ औपचारिकता नहीं होती, बल्कि नए विचारों और बेहतर काम की दिशा तय करने का मौका भी होती है। इसलिए चाहे मीटिंग छोटी हो या बड़ी, उसमें पूरे मन से भाग लेना चाहिए। खुलकर बातचीत करने से टीम के बीच संवाद बना रहता है और नए समाधान तथा बेहतर आइडिया सामने आते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Workplace Communication: अक्सर आप कार्यस्थल पर दिनभर कई मीटिंग्स में शामिल होते हैं, जैसे व्यक्तिगत मीटिंग, विभागीय अपडेट आदि। आपके पास समय सीमित होता है, इसलिए आप हर मीटिंग पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में आपकी सोच यही होती है कि क्या मीटिंग का यह विषय इतना महत्वपूर्ण या रोचक है कि मुझे इस पर पूरी गंभीरता के साथ ध्यान देना चाहिए? असल में यह एक तरह का मानसिक शॉर्टकट है। यानी आप पहले से ही यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि कौन-सी बातचीत आपके लिए महत्वपूर्ण होगी। 

यहां समस्या यह है कि शुरुआत में किसी विषय को कम रोचक समझने की वजह से आप नए विचारों से चूक सकते हैं। इसलिए केवल रोचक या बड़ी मीटिंग्स पर ध्यान देने के बजाय, सामान्य मीटिंग्स को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

थोड़ा समय दें

अक्सर लोग पहले से ही यह तय कर लेते हैं कि उन्हें किस विषय या बातचीत पर ध्यान देना चाहिए और किस पर नहीं। इसके लिए वे जल्दी फैसला लेने वाले मानसिक शॉर्टकट का सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार जो चर्चा शुरुआत में साधारण या कम रोचक लगती है, वही बातचीत शुरू होने के बाद ज्यादा प्रभावी और उपयोगी बन जाती है। इसलिए किसी विषय को पहले से नजरअंदाज करने के बजाय उसे थोड़ा समय देना बेहतर होता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

मीटिंग्स में रुचि दिखाएं

जब आप किसी बैठक में पूर्ण गंभीरता और मनोयोग के साथ शामिल नहीं होते, जैसे बीच-बीच में दूसरे काम करना या जल्दी से निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करना, तो बातचीत गहराई तक नहीं जा पाती। लेकिन जब आप सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल होते हैं, सवाल पूछते हैं और तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, तो साधारण-सा लगने वाला विषय भी महत्वपूर्ण और उपयोगी चर्चा में बदल सकता है। इससे नए विचार सामने आते हैं और टीम के साथ बेहतर समझ भी बनती है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

अपनी सक्रियता दिखाएं

यदि नियमित बैठकों या अपडेट के समय आप अनिच्छुक नजर आते हैं, तो आपके सहकर्मी भी खुलकर अपनी बात साझा करने से हिचकने लगते हैं। ऐसी स्थिति में संगठन के अंदर एक दूरी पनपने लगती है। जब तक आपको इन समस्याओं की जानकारी मिलती है, तब तक वे काफी गंभीर रूप धारण कर चुकी होती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप नियमित अपडेट के दौरान भी सक्रियता दिखाएं, ताकि कर्मचारी खुलकर जानकारी साझा कर सकें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

बातचीत को बढ़ावा दें

रोजमर्रा के विषयों पर खुलकर बातचीत होने से काम में सुगमता और वृद्धि देखने को मिलती है। ऐसे में कर्मचारी भविष्य की चिंताओं या नए विचारों को साझा करने में खुलकर भाग लेते हैं। इसके अलावा, यह धारणा कि नियमित बैठकें काम करने की दक्षता को कम करती हैं, सही नहीं है। वास्तव में, सार्थक और खुला संवाद मानसिक संसाधनों की पुनः पूर्ति करने में मदद करता है, जिससे कर्मचारी अधिक उत्पादक और दृढ़ बनते हैं।
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