Workplace Communication: अक्सर आप कार्यस्थल पर दिनभर कई मीटिंग्स में शामिल होते हैं, जैसे व्यक्तिगत मीटिंग, विभागीय अपडेट आदि। आपके पास समय सीमित होता है, इसलिए आप हर मीटिंग पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में आपकी सोच यही होती है कि क्या मीटिंग का यह विषय इतना महत्वपूर्ण या रोचक है कि मुझे इस पर पूरी गंभीरता के साथ ध्यान देना चाहिए? असल में यह एक तरह का मानसिक शॉर्टकट है। यानी आप पहले से ही यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि कौन-सी बातचीत आपके लिए महत्वपूर्ण होगी।
यहां समस्या यह है कि शुरुआत में किसी विषय को कम रोचक समझने की वजह से आप नए विचारों से चूक सकते हैं। इसलिए केवल रोचक या बड़ी मीटिंग्स पर ध्यान देने के बजाय, सामान्य मीटिंग्स को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।