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NEET UG Counselling: सीट अलॉटमेंट से पहले जान लें ये जरूरी बातें, बढ़ सकते हैं पसंदीदा कॉलेज मिलने के चांस

Sat, 08 Aug 2026 11:17 AM IST
Shahin Praveen प्रदीप कुमार पांडेय, मेडिकल एक्सपर्ट

सार

NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सीट अलॉटमेंट से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है। सही कॉलेज विकल्प भरने, दस्तावेज तैयार रखने और काउंसलिंग नियमों का पालन करने से पसंदीदा कॉलेज मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
NEET Seat Allotment: नीट यूजी 2026 का परिणाम आ चुका है और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने पांच अगस्त से काउंसलिंग प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हर साल हजारों छात्र अच्छी रैंक होने के बावजूद छोटी-छोटी गलतियों के कारण अपने पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में सीट पाने का मौका खो देते हैं। ऐसे में, कौन-सा मेडिकल कॉलेज आपको मिलेगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप काउंसलिंग की रणनीति किस तरह से बनाते हैं। यदि आपने विकल्प सोच-समझकर नहीं भरे या नियमों को ठीक से नहीं समझा, तो आप मनचाहा कॉलेज पाने से चूक सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

समझें काउंसलिंग का पूरा गणित

नीट काउंसलिंग दो भागों में होती है-ऑल इंडिया कोटा (15% सरकारी सीटें, एम्स, जेआईपीएमईआर, केंद्रीय व डीम्ड विश्वविद्यालय) और स्टेट कोटा। एमसीसी पोर्टल पर पंजीकरण के बाद चॉइस फिलिंग और लॉकिंग सबसे अहम चरण होता है। पहले राउंड में फ्री एग्जिट मिलती है, लेकिन दूसरे राउंड में सीट छोड़ने पर सिक्योरिटी फीस जब्त हो सकती है। इसलिए दूसरे राउंड में वही कॉलेज चुनें, जिनमें प्रवेश लेने के लिए आप तैयार हों।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

समझदारी से बनाएं चॉइस लिस्ट

केवल एम्स दिल्ली, एमएएमसी या कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित कॉलेजों को भर देना समझदारी नहीं है। बेहतर रणनीति यह है कि अपनी चॉइस लिस्ट को तीन हिस्सों में बांटें। सबसे पहले 'ड्रीम कॉलेज' रखें, जिनकी कटऑफ आपकी रैंक से थोड़ी बेहतर हो, फिर 'यथार्थवादी कॉलेज', जो आपकी रैंक के सटीक दायरे में आते हों, और अंत में 'सेफ्टी-नेट कॉलेज', यानी वे सरकारी संस्थान, जिनकी कटऑफ आपकी रैंक से नीचे रहती है, ताकि कोई न कोई सुरक्षित सीट आपको अवश्य मिल सके।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock (AI)

समझदारी से बनाएं चॉइस लिस्ट

केवल एम्स दिल्ली, एमएएमसी या कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित कॉलेजों को भर देना समझदारी नहीं है। बेहतर रणनीति यह है कि अपनी चॉइस लिस्ट को तीन हिस्सों में बांटें। सबसे पहले 'ड्रीम कॉलेज' रखें, जिनकी कटऑफ आपकी रैंक से थोड़ी बेहतर हो, फिर 'यथार्थवादी कॉलेज', जो आपकी रैंक के सटीक दायरे में आते हों, और अंत में 'सेफ्टी-नेट कॉलेज', यानी वे सरकारी संस्थान, जिनकी कटऑफ आपकी रैंक से नीचे रहती है, ताकि कोई न कोई सुरक्षित सीट आपको अवश्य मिल सके।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

इन बातों का रखें ध्यान

काउंसलिंग के दौरान दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि या स्पेलिंग की मामूली त्रुटि भी परेशानी का कारण बन सकती है। यदि किसी दस्तावेज में नाम या उपनाम की त्रुटि है, तो पहले से शपथ पत्र (एफिडेविट) तैयार कर लें, ताकि रिपोर्टिंग के समय किसी प्रकार की बाधा न आए। अंत में, कॉलेज में रिपोर्टिंग के समय सभी मूल दस्तावेज साथ ले जाना न भूलें। जरूरी दस्तावेजों में सीट अलॉटमेंट लेटर, नीट एडमिट कार्ड व स्कोरकार्ड, 10वीं-12वीं के प्रमाण पत्र, फोटो और अन्य प्रमाण पत्र शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

सीट चयन में सावधानी बरतें

कई छात्र ऑल इंडिया कोटा में मिली औसत सीट स्वीकार कर लेते हैं, जबकि कुछ दिनों बाद स्टेट कोटा में उन्हें बेहतर कॉलेज मिलने की संभावना होती है। इस गलती से बचने के लिए एमसीसी और राज्य काउंसलिंग की पूरी टाइमलाइन का तुलनात्मक कैलेंडर बनाएं। यदि राज्य कोटा में बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद हो, तो एआईक्यू में अपग्रेडेशन का विकल्प सोच-समझकर चुनें। सही समन्वय आपको बेहतर कॉलेज दिला सकता है।
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