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Leadership: लीडरशिप में अनदेखी कमजोरियां, क्या आप भी इन्हें नहीं देख पा रहे? ऐसे पहचानें अपने ब्लाइंडस्पॉट्स

Fri, 15 Aug 2025 03:50 PM IST
शाहीन परवीन मार्टिन डबिन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Blindspots: लीडरशिप में कुछ कमजोरियां ऐसी होती हैं, जो दूसरों को दिखाई देती हैं, लेकिन आप खुद उन्हें नहीं देख पाते। इन्हें ही ब्लाइंडस्पॉट्स कहा जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Hidden Weaknesses: ईमानदार और समय पर मिला फीडबैक सोच, व्यवहार और लीडरशिप की दिशा बदल सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे आप किसी संगठन में ऊंचे ओहदों पर पहुंचने लगते हैं, तो कुछ चुनौतियां या आपकी कमजोरियां कई बार आपको नजर ही नहीं आतीं। इन्हें लीडरशिप में ब्लाइंडस्पॉट यानी अनदेखी कमजोरियां कहा जाता है। ये ऐसी कमजोरियां या चुनौतियां होती हैं, जिन्हें दूसरे लोग तो पहचान लेते हैं, लेकिन खुद आपको उनका अंदाजा नहीं होता। 
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
इनके साथ समस्या यह है कि ये चुपचाप आपके फैसलों, व्यवहार और प्रभाव को कमजोर करती रहती हैं और अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए, तो ये आपके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास, दोनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सवाल यह है कि इन ब्लाइंडस्पॉट्स को कैसे पहचाना जाए और कैसे सुधारा जाए? यहां इसके कुछ बेहतरीन तरीके बताए गए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

उतावलापन न दिखाएं

जब आप अपने किसी लीडरशिप गुण का बहुत ज्यादा या अनुचित तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपकी कमजोरी बन जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आत्मविश्वास हद से ज्यादा हो जाए, तो वह अहंकार लगने लगता है। 

इसके अलावा, निर्णायक स्वभाव होना बेशक सही है, लेकिन अगर आप बिना सोचे-समझे तुरंत फैसला ले लेंगे, तो लोग आपको उतावला समझ सकते हैं। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए वक्त-वक्त पर खुद से पूछें कि क्या मैं इस स्थिति में संतुलन बनाए हुए हूं?

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

फैसलों में साफगोई

हो सकता है बतौर लीडर आपके भीतर कुछ ऐसी छिपी हुई प्रेरणाएं हों, जिन्हें आप खुलकर जाहिर न कर पा रहे हों। ये प्रेरणाएं सत्ता की भूख, पैसे का लालच या उपलब्धियों का जोश, कुछ भी हो सकती हैं। ऐसे में, खुद से सवाल पूछें कि मैं यह काम क्यों कर रहा हूं और इसका असली मकसद क्या है? अगर आपको इसका जवाब मिल जाता है, तो आपके फैसलों में भी साफगोई आ जाएगी। कोई भी फैसला सोच-समझकर ही लें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

सीमित नजरियों में फंसकर न रहें

जब आप नए विचारों को अपनाने में या परिस्थितियों के साथ खुद को ढालने में हिचकिचाने लगें, तो समझिए दिक्कत है। इसका कारण है कि कई बार आप अपने ज्ञान व सोच के सीमित नजरियों में फंसकर रह जाते हैं तथा दूसरों की भावनाओं को नहीं समझ पाते। इससे टीम के साथ आपके रिश्तों में खटास पैदा होती है। इसलिए दूसरों के विचारों को भी समझें और सही प्रतिक्रिया दें। सोचें कि क्या आपके विचार व मूल्य मौजूदा भूमिका के साथ मेल खाते हैं? अगर नहीं, तो बदलाव करने से डरें नहीं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

नेतृत्व का असली आधार

लीडरशिप में सबसे बड़ी गलती यह मान लेना है कि मैं सब जानता हूं। जैसे ही यह ख्याल आपके दिमाग में आता है आप बदलाव से दूर हो जाते हैं, नए विचारों को नजरअंदाज करने लगते हैं और बाजार या माहौल के हिसाब से खुद को ढालने में पिछड़ जाते हैं। इसलिए, अपने सहकर्मियों की राय और फीडबैक को अपनाइए।
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