फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूजीसी ने न्यायालय से कहा, विद्यार्थी के अकादमिक करियर में अंतिम परीक्षा अहम

Fri, 14 Aug 2020 06:18 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
ugc
विज्ञापन
13 अगस्त (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से उच्चतम न्यायालय से कहा कि विद्यार्थी के अकादमिक करियर में अंतिम परीक्षा ‘महत्वपूर्ण’ होती है और राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 30 सितंबर तक के अंत तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से परीक्षा कराने को कहने वाले उसके छह जुलाई के निर्देश बाध्यकारी नहीं’ है।
विज्ञापन


यूजीसी ने कहा कि छह जुलाई को उसके द्वारा जारी दिशा-निर्देश विशेषज्ञों की सिफारिश पर अधारित हैं और उचित विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया गया। आयोग ने कहा कि यह दावा गलत है कि दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम परीक्षा कराना संभव नहीं है।

पूर्व में महाराष्ट्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब देते हुए यूजीसी ने कहा, ‘‘एक ओर राज्य सरकार (महाराष्ट्र) कह रही है कि छात्रों के हित के लिए शैक्षणिक सत्र शुरू किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने और बिना परीक्षा उपाधि देने की बात कर रही है। इससे छात्रों के भविष्य को अपूरणीय क्षति होगी। इसलिए यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार के तर्क में दम नहीं है।
विज्ञापन


यूजीसी ने दिल्ली सरकार द्वारा शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे पर भी अपना जवाब दाखिल किया। उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त को यूजीसी ने कोविड-19 महामारी के चलते दिल्ली और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह नियमों के विपरीत है।
Trending Videos
विज्ञापन

महाराष्ट्र सरकार के हलफनामे का जवाब देते हुए यूजीसी ने कहा कि यह कहना पूरी तरह से गलत है कि छह जुलाई को जारी उसका संशोधित दिशा-निर्देश राज्य सरकार और उसके विश्वविद्यालयों के लिए बाध्यकारी नहीं है।

आयोग ने कहा कि वह पहले ही 30 सितंबर तक सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के लिए छह जुलाई को जारी दिशा-निर्देश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाबी हलफनामा दाखिल कर चुका है।

आयोग ने कहा कि दिशा-निर्देश में विश्वविद्यालयों या संस्थानों द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षा या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए पर्याप्त ढील दी गई है और इसे जारी करने से पहले सभी हितधारकों से परामर्श किया गया है।

यूजीसी ने कहा कि महाराष्ट्र का हलफनामा उसके अपने ही दावे के विपरीत है कि मौजूदा परिस्थितियां कथित तौर पर ऐसी हैं कि विश्वविद्यालय एवं संस्थान अंतिम वर्ष की परीक्षा भी नहीं करा सकते हैं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं है कि वे कथित परिस्थितियां अगला शैक्षणिक सत्र शुरू करने से भी रोकती हैं।’’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 10 अगस्त को शीर्ष अदालत से कहा कि राज्य सरकारें आयोग के नियमों को नहीं बदल सकती हैं, क्योंकि यूजीसी ही डिग्री देने के नियम तय करने के लिए अधिकृत है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें