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मोदी सरकार@3: नरेंद्र मोदी का ये 'खास गुण' हर भारतीय को सीखना चाहिए

Fri, 26 May 2017 10:53 AM IST
amarujala.com- Written by: शिवेन्दु शेखर
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लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद देश ने सालों बाद किसी एक पार्टी को इतने बड़े बहुमत से सरकार बनाते हुए देखा। देश की युवा पीढ़ी के लिए शायद ये ऐसा पहला मौका होगा जब कोई ऐसा ऐतिहासिक घटनाक्रम इनकी आंखों के सामने हो रहा था। जिसके बनने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाचन शैली का बड़ा हाथ था। अब मोदी सरकार के लगभग तीन साल पूरे हो गए हैं और आज हम आपको बता रहे हैं कैसे आप नरेंद्र मोदी से सीख सकते हैं एक अच्छा वक्ता होना। आगे पढ़ें... 

1. खुल कर बोलनाः किसी भी अच्छे वक्ता की पहली निशानी होती है कि वो अपनी बातें ऑडियंस के सामने खुल कर रखता है। उसे अपनी बात कहने के पहले हिचक नही होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी भी भाषण को आप खोल कर देखिए तो आप पाएंगे कि नरेंद्र मोदी अपने भाषणों के दौरान आपको ये सोचते हुए कभी नहीं मिलेंगे कि इसके आगे क्या बोलना है और इससे जनता भाषण से जुड़ी रहती है। 
 
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नरेंद्र मोदी - फोटो : Source
2. बोलने से पहले मुद्दे की जानकारीः अगर आपको वाकई शौक है कि आप एक अच्छे वक्तता बने तो इसके लिए सबसे जरूरी है कि आपको जिस मुद्दे पर बात करनी है उसकी तह तक जानकारी आपके पास होनी चाहिए। प्रधानमंत्री की ये बहुत बड़ी खासियत है कि वो किसी मुद्दे पर बोलते हुए सतही बात नहीं करते, अपनी बात के साथ वो उससे जुड़ा साक्ष्य या इतिहास के किसी किस्से के साथ उसे जोड़ कर बताते हैं। जब तक आप मुद्दे को तह तक नहीं जानेंगे तो आप खुल कर बोल ही नहीं पाएंगे। 
 
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नरेंद्र मोदी - फोटो : Source
3. शब्दों का पूरा उच्चारणः भाषण देना या बड़ी ऑडियंस के सामने बोलना हो तो आपको सुनने वाले की रुची का भी ख्याल रखना होता है। आप अगर अपनी बात रखते हुए शब्दों को आघा अधूरा बाहर निकालेंगे तो ऑडियंस आपसे धीरे-धीरे बोर होने लगती है और वो आपसे कटने लगती है।    
 

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नरेंद्र मोदी - फोटो : Source
4. गले से नहीं पेट से आवाज निकालनाः कभी जोर से जोर से चीख कर अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करने वाले को ध्यान से सुनिएगा वो गले से नहीं बल्कि पेट से बोलता है। इससे फायदा ये होता है कि आवाज साफ और तेज निकलती है। इसके अलावे आवाज में वजन आता है।  
 
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नरेंद्र मोदी
5. आवाज मॉड्यूलेट करनाः जैसे ही आप चौथे नंबर की टेकनीक से खुद को वाकिफ करा लेते हैं ठीक उसी वक्त आपका अपनी आवाज पर कंट्रोल हो जाता है। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से और मौके की नजाकत को ध्यान में रख कर उस अंदाज में अपनी बात पेश करते हैं। इससे जनता या सुननेवाला आपकी तरफ सम्मोहित होने लगता है। शायद अब आपको पता ही हो कि जब नरेंद्र मोदी अपनी बात रख रहे होते हैं तो जनता क्यों तालियां पीटती रहती है।  
 
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नरेंद्र मोदी - फोटो : Source
6. एक्सप्रेशनः आवाज के बाद एक वक्ता का सबसे बड़ा हथियार होता है उसके एक्सप्रेशन। आप किस मौके पर किस मुद्दे पर बात कर रहे हैं आपके चेहरे का एक्सप्रेसन उस हिसाब से तय होता है। इससे जनता को इस बात से बात फर्क नही पड़ता कि आप उसके मतलब की कितनी बात कर रहे हैं। उसे बस आपकी बात सुनने का आनंद लेना होता है। 
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नरेंद्र मोदी - फोटो : Source
​7. सामने की ऑडियंस से इंटरेक्शनः अब बारी आती है, जनता से या सुनने वाले से आप कितना इंटरेक्ट करते हैं। वरना सुनने वाले को ऐसा महसूस होता है कि आप सिर्फ अपनी बात कहे जा रहे हैं एक राग अलाप रहे हैं और वो बोर हो कर आपसे दूर भागना शुरू करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषण हों या किसी मौका विशेष का भाषण हो, उनमें ऑडियंस से सवाल को भी जगह दी जाती है। जैसे...बिजली मिली? घर मिला? या कोई वादा किया था वो पूरा हुआ?इससे जनता आपसे खुद को कनेक्टेड मानती है।  
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