फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

13 साल की उम्र में छोड़ना पड़ा था स्कूल, अपनी मेहनत से यूं बनी एशियन बिजनेस वुमन ऑफ ईयर

Thu, 16 Nov 2017 08:31 AM IST
amarujala.com- Presented by: अपूर्वा राय
विज्ञापन
1 of 5
कुछ उपलब्धियां ऐसी होती हैं, जो हासिल करने वाले के अपने जीवन में ‘मील का पत्थर’ तो होती ही हैं, दूसरे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का सबब भी बनती हैं। बिहार में जन्मीं 65 साल की आशा खेमका को इस साल ब्रिटेन में 'एशियन बिजनेसवुमेन ऑफ द ईयर' के खिताब से नवाजा गया। वो वहां के एक प्रतिष्ठित कॉलेज की सीईओ और प्रिंसिपल हैं।

पढ़ें-  40 से ज्यादा कंपनियों के रिजेक्शन ने एक इंजीनियर को बनाया सफल स्टार्टअप का मालिक
 
विज्ञापन

2 of 5
आशा आज ब्रिटेन के एक प्रतिष्ठित कॉलेज की प्रिंसिपल तो है लेकिन एक वक्त ऐसा था जब महज 13 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। सुनने में ये कहानी बेशक फिल्मी लगती है, लेकिन ये फिल्मी कहानी नहीं है। आशा की शादी कम उम्र में ही हो गई। आशा को अंग्रेजी नहीं आती थी लेकिन उन्होंने इस बात को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
 
विज्ञापन

3 of 5
ASHA
बच्चों के टीवी शो देखकर और दूसरों से बातचीत करके उन्होंने अंग्रेजी सीखी। जब बच्चे कुछ बड़े हो गए तो उन्होंने अपनी पढ़ाई को फिर से शुरू किया। फिर कार्डिफ यूनिवर्सिटी से बिजनेस डिग्री हासिल की और उसके बाद टीचिंग के क्षेत्र में कदम रखा। फिर 2006 में वह वेस्ट नॉटिंघम कॉलेज की प्रिंसीपल बनीं। यह कॉलेज इंग्लैंड के सबसे बड़े कॉलेजों में से एक है।
 

4 of 5
आज आशा खेमका ‘असोसिएशन ऑफ कॉलेजेज इन इंडिया’ की चेयरपर्सन भी हैं। उनका एक चैरिटेबल ट्रस्ट भी है ‘द इंस्पायर एंड अचीव फाउंडेशन’।  2013 में उन्हें ब्रिटेन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘डेम कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ से सम्मानित किया जा चुका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आशा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि दृढ आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम से कुछ भी संभव है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें