स्कूल में हमेशा अव्वल आई
मेरा बचपन किसी सामान्य भारतीय लड़की के जीवन की तरह बहुत ही सहज तरीके से एक छोटे से कस्बाई परिवेश में बीता है। चाहे वह मेहंदी लगाना हो या फिर लड़कियों की दूसरी गतिविधियां, मैंने ऐसे कामों में हमेशा भाग लिया। लेकिन इसके साथ पढ़ाई के प्रति मैं हमेशा संजीदा रही। स्कूल में मैं हमेशा अव्वल आई। उच्च शिक्षा के लिए घर छोड़ने से पहले जब तक घर में रही, मेरे पिता मेरे सबसे अच्छे शिक्षक रहे। उन्होंने मुझे सोचने, खेलने-कूदने, करियर के चुनाव की पूरी आजादी दी। किसी भी काम को पूरी तन्मयता से करना हमेशा से मेरी पहचान रहा।