फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीसरी कक्षा में छोड़ दी पढ़ाई, लेकिन अपनी रचनाओं के लिए राष्ट्रपति से मिला सम्मान

Tue, 14 Feb 2017 07:21 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
- फोटो : StoryPick
66 साल के हलदर नाग को उनकी सभी कविताएं और कहानियां मुंहजुबानी याद हैं। उनकी कविताओं को सिर्फ उड़ीसा ही नहीं, देशभर में सराहा गया है।
विज्ञापन

2 of 5
उड़ीसा में पले-बढ़े हलदर कोई आम कवि नहीं हैं, उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों पद्मश्री जैसा बड़ा सम्मान भी मिल चुका है। कोसली भाषा में उत्तीर्ण हलदर ने इसमें कई कविताएं और कहानियां लिखीं हैं।
विज्ञापन

3 of 5
उड़िया साहित्य में अपने इसी योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान मिला। हलदर खुद केवल तीसरी कक्षा तक पढ़े हैं लेकिन 5 पीएचडी छात्रों ने उनपर थीसिस लिखी है। उनकी कविताओं को संभलपुर विश्वविद्यालय ने अपने सिलेबस में लिया है।

4 of 5
हलदर का बचपन काफी गरीबी में बीता है। जब वे 10 साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया जिसके बाद परिवार को काफी आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ीं। उन्होंने एक दुकान में बर्तन धोने का काम किया और फिर एक स्कूल में 16 सालों तक खाना बनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
उन्होंने जब अपनी पहली कविता लिखी और वह एक लोकल मैगजीन में छपी तो उन्हें लिखते रहने की प्रेरणा मिली।उन्होंने प्रकृति, समाज, धर्म और पौराणिक कथाओं पर काफी लिखा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें