बचपन में आपने कई ऐसी कहानियां सुनी होंगी जिन्हें सुनकर लगता है कि क्या वाकई इस दुनिया में ये मुमकिन है? क्या कोई ऐसा भी हो सकता है जो दूसरों के सपनों को जीता हो, किसी और के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करता हो। कामयाबी और सपनों में बड़ा गहरा रिश्ता होता है। जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफर पर चल पड़ती है तो लाख मुसीबतों के बाद भी सफलता कदम चूमने को बेकरार हो जाती है। हम बात कर रहें है एक ऐसे मसीहा की जो हर साल अपने छात्रों के नामुमकिन सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करता है। वो शख्स है 'सुपर 30' के सुपर गुरु आनंद कुमार।
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आनंद कुमार
बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले आनंद कुमार के पिता क्लर्क थे। घर की माली हालत अच्छी न होने की वजह से उनकी पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई जहां उनका गणित से लगाव हुआ। यहां उन्होंने खुद से मैथ्स के नए फॉर्मूले खोजे। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने नंबर थ्योरी में पेपर सब्मिट किए जो मैथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मैथेमेटिकल गैजेट में पब्लिश हुए।
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आनंद कुमार
आनंद कुमार को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एडमिशन के लिए बुलाया गया लेकिन पिता की मृत्यु और तंग आर्थिक हालत के चलते उनका सपना साकार नहीं हो सका और यहीं से शुरू हुआ एक ऐसे सपने को साकार करने का जज्बा जिसने आनंद कुमार को देश विदेश में मशहूर कर दिया। हम सब सपने देखते हैं खुद की कामयाबी के खुद की तरक्की के, लेकिन आनंद ऐसे हैं जिन्होंने सपना देखा गरीब बच्चों के लिए।
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आनंद कुमार
बात है साल 2002 की। आनंद कुमार ने रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स में छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना शुरू कर दिया था। दो बच्चों से अब वहां आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 500 तक हो गई थी। एक दिन एक लड़के ने आनंद से कहा कि सर हम गरीब हैं अगर हमारे पास फीस ही नहीं है तो देश के अच्छे कॉलेजों में कैसे पढ़ सकते हैं? इस बात से आनंद इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने इन गरीब बच्चों के लिए सुपर 30 की शुरूआत कर दी।
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आनंद कुमार
सुपर 30 इंस्टीट्यूट के पहले ही बैच से IIT में 18 बच्चों का चयन हुआ। इसके बाद से कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा। साल दर साल बच्चों की मेहनत और आनंद कुमार की बेजोड़ स्टडी स्टैटजी के बलबूते अब तक सुपर 30 से कुल 396 छात्रों ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफलता पाई है।
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आनंद कुमार
संस्थान गरीब परिवारों के 30 बच्चों का चयन करता है और उन्हें मुफ्त कोचिंग, भोजन और रहने की सुविधा देता है ताकि वे अपना ध्यान केवल आईआईटी-जेईई में सफल होने पर केंद्रित कर सकें। इसी वजह से इस इंस्टिट्यूट को सुपर-30 के नाम से जाना जाता है।
आज कामयाबी की गांरटी बन चुके आनंद कुमार इन छात्रों के लिए किसी गॉड फादर से कम नहीं है। फर्श से अर्श तक पहुंचने का रास्ता जो 'सुपर 30' इन छात्रों को दिखा रहा है वो मिसाल है। सुपर 30 पर फिल्म भी बन रही है। इससे पहले इस पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी हैं।