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दो जुड़वां भाई, दोनों को गंभीर बीमारी...फिर भी रचा इतिहास, खुद बताया कैसे क्रैक किया NEET

Tue, 26 Jun 2018 09:46 AM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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जुड़वां भाइयों ने क्लीयर किया नीट एग्जाम
दो जुड़वां भाई और दोनों को बेहद गंभीर बीमारी, उसके बावजूद हौंसला नहीं छोड़ा। नीट का एग्जाम क्रैक करके इतिहास रच दिया, अब खुद बता रहे हैं सफलता का राज।
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जुड़वां भाइयों ने क्लीयर किया नीट एग्जाम
हरियाणा में रोहतक जिले से लगभग 37 किलोमीटर दूर गांव अजायब के दो जुड़वां भाइयों ने नीट परीक्षा में 8वीं और 127वीं रैंक प्राप्त कर मिसाल कायम की है। यह कामयाबी इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है कि ये दोनों विद्यार्थी थैलेसीमिया जैसी बीमारी से जंग भी लड़ रहे हैं। स्वयं का उपचार कराने के दौरान दोनों भाइयों ने महसूस किया कि यदि डॉक्टर न होते तो वे जीवित न रहते। इसी सोच ने उनके अंदर डॉक्टर बनने की जिज्ञासा जागृत की और उन्होंने नीट परीक्षा पास की।
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नीट टॉपर जुड़वां भाई - फोटो : डेमो
अब निशु जहां दिल का डॉक्टर बनना चाहते हैं, वहीं आशु आंखों का डॉक्टर बनना चाहते हैं। पेशे से साइंस मास्टर कृष्ण सिंह नैन ने बताया कि वह जीएमएस एलबीएस नगर रोहतक में तैनात हैं और उनकी पत्नी प्रमिला देवी दिल्ली कमरुद्दीन नगर डिस्पेंसरी में एएनएम के पद पर हैं। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें आशु नैन व निशु नैन दोनों बडे़ जुड़वां बेटे हैं। वर्ष 2009 में उनको पता चला कि दोनों को थैलेसीमिया बीमारी है। मां-बाप टूट गए, लेकिन आशु व निशु ने हिम्मत दिखाई और दोनों ने अपना उपचार पीजीआईएमएस रोहतक से शुरू कराया।

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नीट टॉपर जुड़वां भाई
दोनों पर बीमारी का उपचार करवाने के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी भी थी। हर महीने दो बार रक्त चढ़वाना पड़ता है, जिसके चलते पांच से सात दिन उन्हें पीजीआईएमएस में रहना पड़ता। अब दोनों ने नीट क्लीयर किया है। निशु को दिल्ली के किसी भी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल सकती है, जबकि आशु को भी अच्छी रैंक होने के चलते रोहतक पीजीआईएमएस में ही सीट मिल सकती है। दोनों की इच्छा है कि वे डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करें। निशु ने 12वीं में 92.5 व आशु ने 84 फीसदी अंक प्राप्त किए थे।
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नीट टॉपर जुड़वां भाई
आशु ने अपनी कक्षाओं के दौरान रोहतक में ही एक कोचिंग सेंटर से वीकेंड पर तैयारी की, जबकि निशु ने सिर्फ क्लास लगाई। जीवन रेखा योजना के प्रमुख नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण मल्होत्रा निशु व आशु की उपलब्धियों का श्रेय उनकी मेहनत और लगन को देते हैं। चिकित्सक का कहना है कि दोनों को जब भी कोई समस्या होती थी तो वह अकेले ही उपचार करवाने आ जाते थे। इन्हें देख कर हर कोई हैरान होता था कि बच्चे इतनी हिम्मत वाले हैं।
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नीट टॉपर जुड़वां भाई
थैलेसीमिया के साथ काला पीलिया भी
आशु और निशू के पिता ने बताया कि उनके बेटों की समस्या थैलेसीमिया पर ही समाप्त नहीं हुई, उन्हें काला पीलिया भी हो गया। इसका उपचार उन्होंने पीजीआई रोहतक के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा से कराया। उनके उपचार में हरियाणा सरकार की जीवन रेखा योजना का काफी योगदान रहा, क्योंकि थैलेसिमिया के साथ काला पीलिया का उपचार कराना आसान नहीं था। इसमें सरकार की ओर से जारी योजना के चलते दोनों का उपचार दो लाख रुपये में हो गया, जो बाद में उन्हें मिल भी गया। निजी अस्पताल में आठ लाख रुपये खर्च होते थे।
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