गजब का हौंसला रखने वाली छोटे से शहर में जन्मी इस होनहार बेटी से मिलिए। आसमान छूने का ऐसा जुनून कि रच दिया अनूठा इतिहास।
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शिवांगी पाठक
हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार की रहने वाली 16 साल की लड़की शिवांगी पाठक की, जिन्होंने अपने नाम एक अनूठी उपलब्धी जोड़ ली। वीरवार को शिवांगी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करके इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाली वह सबसे कम उम्र की महिलाओं की लिस्ट में शामिल हो गईं।
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शिवांगी पाठक
शिवांगी ने यह कारनामा 'सेवन समिट ट्रेक' में हिस्सा लेने के दौरान किया। वह एवरेस्ट पर चढ़कर दुनिया को यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाएं किसी भी लक्ष्य को पा सकने में सक्षम हैं। शिवांगी ने दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को अपनी प्रेरणा बताया। अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली विश्व की पहली दिव्यांग पर्वतारोही हैं।
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शिवांगी पाठक
एवरेस्ट (29,000 फुट) पर सफल चढ़ाई से शिवांगी काफी खुश हैं, उन्होंने दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को अपनी प्रेरणा बताया। बता दें कि अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली विश्व की पहली दिव्यांग पर्वतारोही हैं। शिवांगी हमेशा से माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई का सपना देखा करती थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा था कि वह इस सुंदर ग्रह के हर पर्वत पर चढ़ना चाहती हैं।
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माउंट एवरेस्ट
शिवांगी से पहले अरुणाचल प्रदेश की मुरी लिंग्गी ने एवरेस्ट को फतह किया। 40 साल की लिंग्गी चार बेटियों की मां हैं। उन्होंने 14 मई को सुबह 8 बजे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह किया। वह तिन मेना और अंशु जामसेनपा के बाद एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीसरी महिला हैं। लिंग्गी ने 2013 में पश्चिम कमेंग जिले में राष्ट्रीय पर्वतारोहण और संबंधित खेल संस्थान से पर्वतारोहण का कोर्स किया था। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश की मेंथोसा चोटी और 2017 में अरुणाचल की गोरीचेन चोटी फतह कर चुकी हैं। उनकी प्रेरणा तिन मेना अरूणाचल प्रदेश की वह पहली महिला थी जिन्होंने 2011 में माउंट एवरेस्ट फतह की थी।
रोहताश खिलेरी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतेह कर जिले के साथ-साथ राज्य का नाम पूरे देश में रोशन किया है। 21 वर्षीय रोहताश ने बताया कि माउंट एवरेस्ट की 8,848 मीटर की चढ़ाई पूरी करने में रोहताश उन्हें को करीब 25 लाख रुपये की जरूरत थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे रोहताश के पिता सुभाष चन्द्र ने जमीन गिरवी रखकर उनके एवरेस्ट मिशन के लिए पैसों का इंतजाम किया। पेशे से किसान सुभाष बताते है कि वर्ष 2014 में रोहताश नेपाल खेलने गया थे, जहां ऊंची पहाड़ियों को देखकर उनके मन में इसका शिखर को छूने की इच्छा हुई। रोहताश को एवरेस्ट की चढ़ाई करने के दौरान कई बार तूफानों का सामना करना पड़ा।