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बहादुर बेटीः दादी के सपनों को उड़ान दी और रच दिया अनोखा इतिहास...जज्बा गजब का

Wed, 18 Jul 2018 02:39 PM IST
सीमा एस आनंद/सुदेश तनेजा, अमर उजाला, चंडीगढ़/राजपुरा
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अवनीत कौर
मिलिए इस बहादुर बेटी से, जिसने आखिरी सांसें ले रही दादी से एक वादा किया और उसे ऐसे निभाया कि अनोखा इतिहास रच दिया। लड़की में जज्बा गजब का है। जानिए कौन है ये लड़की और इसने क्या कारनामा किया है। 
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अवनीत कौर
ये है पंजाब में अमृतसर जिले की रहने वाली अवनीत कौर, जो 13 साल 8 माह से बिना कोई छुट्टी लिए रोज स्कूल जा रही है। इस कारनामे के लिए उसका नाम इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है। अवनीत बताती हैं कि उसकी दादी कहती थीं कि बेटा कभी स्कूल से छुट्टी न करना। उसने भी दादी की बात को ऐसा माना कि दादी की मौत के अगले दिन चार मई 2016 को भी वह स्कूल गई।
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अवनीत कौर
18 जुलाई 2001 को जन्मी अवनीत कौर ने नर्सरी से बारहवीं तक एक भी छुट्टी नहीं ली। दादी से किए इस वादे को पूरा करने के लिए कई फंक्शन छोड़े। रिश्तेदारों के ताने भी सुने, लेकिन स्कूल जाना नहीं छोड़ा। अब जब उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो गया है तो सहपाठियों से लेकर रिश्तेदार तक उस पर नाज कर रहे हैं। अवनीत राजपुरा की मिर्च मंडी में स्थित श्री गुरु अर्जुन देव जल सेवा सोसाइटी के प्रबंधक दातार सिंह भाटिया की दोहती है। उसकी इस उपलब्धि पर दातार सिंह के घर पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

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अवनीत कौर
दोहती की उपलब्धि से गदगद नाना ने उसे खास पुरस्कार भी दिया है। अवनीत ने नॉन मेडिकल से बारहवीं की है और अब श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में बीटेक में दाखिला लिया है। अब भी उसने अपना रिकार्ड जारी रखने की ठान रखी है। अवनीत का कहना है कि जब वह तीसरी कक्षा में थी तो रेगुलर रहने के कारण उसकी मम्मी मनबीर कौर ने प्रिंसिपल रमा महाजन से कहा कि अवनीत को सम्मानित किया जाए। इस पर प्रिंसिपल ने कहा कि ऐसे तो बहुत बच्चे हैं, जो रेगुलर हैं।
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अवनीत कौर
अवनीत का कहना है कि उसने तभी यह प्रण ले लिया कि वह उन सभी का रिकार्ड तोड़कर सम्मान पाएगी। वह अपने इस रिकार्ड का श्रेय अपने माता-पिता मनबीर कौर और नरिंदरपाल सिंह, प्रिंसिपल रमा महाजन और स्कूल स्टाफ को देती है। अब उसका सपना इंजीनियर बनने का है। 26 मई को अवनीत का नाम इस अवार्ड के लिए फाइनल हो गया था और 14 जून को उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में आया। इसके लिए सारी औपचारिकताएं अवनीत के भाई ने ही पूरी कीं।
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अवनीत कौर
बच्चों को सही तरीके से जब कोई बात बताई जाए तो वे जरूर फालो करते हैं। उनके स्कूल में दो और भी बच्चे हैं जो नर्सरी से रेगुलर हैं। दसवीं में अवनीत की मेरिट आई थी। मैंने हेल्थ मिनिस्ट्री को भी अवनीत को सम्मानित करने केलिए कहा है। वह स्वस्थ रही, जिस कारण ही यह रिकार्ड बना पाई। मुझे अवनीत पर गर्व है।
- रमा महाजन, प्रिंसिपल, अजीत विद्यालय, अमृतसर
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