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साल 2017 के ये हैं टॉप IPS अधिकारी, दूर दूर तक फैले हैं बहादुरी के किस्से, आप भी करेंगे सेल्यूट

Thu, 04 Jan 2018 05:37 PM IST
जॉब डेस्क, अमर उजाला
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साल 2017 कुछ लोगों के लिए अच्छा गया तो कुछ लोगों ने बहुत कुछ खोया। अक्सर हम उन चीजों के बारे में बात करते हैं कि जिन्हें हमने खोया या पाया होता है। कभी उनके बारे में नहीं सोचते हैं, जिनकी वजह से हमें अपनी चीजें हासिल होती हैं। जिनके कारण हम सूकून की नींद सोते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं प्रशासनिक अधिकारियों की जिनकी दिन-रात की मेहनत हमें घर में सूकून कि जिंदगी देती है।
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असरा गर्ग 
CBI, भिलाई ब्रांच के असरा गर्ग की बहादुरी के किस्से दूर-दूर तक फैले हैं। तमिलनाडु कैडर के 2004 बैच के आईपीएस असरा गर्ग ने पुलिस की छवि ही लोगों को सामने बदल दी है। उन्होंने साबित किया कि ईमानदारी के दम पर भी अपराधियों के दिल में खौफ पैदा किया जा सकता है।
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डीआईजी रूपा डी मुद्गल 
लेडी सिंघम के नाम से मशहूर डीआईजी रूपा डी मुद्गल सोशल मीडिया का काफी लोकप्रिय चेहरा हैं। वो सुर्खियों में तब आई थीं जब उन्होंने जेल में बंद शशिकला की पोल खोली थी। उन्होंने अपने सीनियर,  DGP के. सत्यनारायण राव पर ये आरोप लगाया था कि उनके कारण ही जेल में बंद शशिकला को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। शशिकला जिस बैरक में बंद हैं, वहां पर उन्हें एक पर्सनल किचन दिया गया है, उन्होंने बताया कि यह किचन बनवाने के लिए जेल प्रशासन को 2 करोड़ रुपये दिए गए थे। ये वो ही रूपा हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश में बतौर एसपी तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को धार्मिक दंगों के चलते गिरफ्तार किया था। डी रूपा साल 2000 बैच की आईपीएस ऑफिसर हैं।

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मनीष शंकर शर्मा 
मध्य प्रदेश के सीनियर IPS ऑफिसर आईजी मनीष शंकर शर्मा एक रीयल हीरो हैं। उन्होंने अपनी बहादुरी, ईमानदारी और सच्चाई से देश का नाम रोशन किया है। उन्हें मुंबई में नेशनल लॉ डे अवार्ड-2016 से सम्मानित भी किया गया था। मनीष शंकर शर्मा को यह अवार्ड कानून व्यवस्था कैटेगरी में विश्वव्यापी आतंकवाद को रोकने की दिशा में किए गए श्रेष्ठतम कार्यों के लिए दिया गया था। आपको बता दें कि वह 1992 बैच के IPS अधिकारी हैं। 
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महेश मुरलीधर भागवत 
तेलंगाना के महेश मुरलीधर भागवत से हर दुश्मन डरता है। अपनी ईमानदारी और बहादुरी के लिए इन्हें 2017 Trafficking in Persons अवॉर्ड से नवाजा गया है। 
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आर श्रीलेखा 
आर श्रीलेखा केरल की पहली महिला डीजीपी हैं। उन्होंने ये साबित किया है कि महिलाएं केवल घर ही नहीं संभाल सकती हैं बल्कि वो दुर्गा बनकर दुश्मनों को नष्ट भी कर सकती हैं। इनकी बहादुरी के किस्से दूर-दूर तक मशहूर हैं और इसी वजह से उन्हें 'रेड श्रीलेखा' कहा जाता है। मात्र 26 साल की उम्र में जनवरी 1987 में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनकर श्रीलेखा ने इतिहास रचा था। 
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संजुक्‍ता पराशर 
असम की IPS ऑफिसर संजुक्‍ता पराशर को लोग रानी लक्ष्मीबाई कहते हैं क्योंकि उन्होंने 15 महीने में 64 आतंकवादियों को पकड़कर एक नया इतिहास रचा है। मूल रूप से असम निवासी संजुक्ता ने दिल्‍ली के इंद्रप्रस्‍थ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। वह साल 2006 बैच की आईपीएस ऑफिसर हैं। उन्‍होंने सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक हासिल की थी। 
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