'प्रश्न पत्र में गलतियां थीं'
प्रदीपा के पिता कहते हैं, "प्रदीपा को फ़िल्में देखना पसंद था। वो ऐसी छात्रा नहीं थी कि सारी रात जाग कर पढ़ाई करे। वो पढ़ाई को साधारण वक्त देती थी और अच्छे नंबर लाती थी।" उनके पिता कहते हैं कि प्रश्नपत्र में तमिल से हुए अंग्रेज़ी अनुवाद में कई ग़तलियां थीं और प्रदीपा को इस बात का पता था। उसके बारे में उन्होंने सीबीएसई को भी लिखा था। वो कहते हैं, "उसे यकीन था कि वो 500 नंबर ले कर आएगी, लेकिन उसके 39 नंबर ही आए, जो वो बर्दाश्त नहीं कर सकी।" उमा प्रिया कहती हैं, "मैं, और मेरा भाई- हम उसे अपने दोस्त की तरह ही देखते थे लेकिन उसने कभी भी हमारे साथ पढ़ाई से जुड़ी मुश्किलों के बारे में बात नहीं की। वो इस सिलसिले में अपने टीचरों से ही बात करती थी।"
प्रदीपा की मौत के बाद से नीट का विरोध करने वाले कई कार्यकर्ता उनके माता-पिता से मिलने उनके घर पहुंचें। बीते साल नीट परीक्षा के नतीजे आने के बाद अनीता नाम की एक लड़की ने भी खुदकुशी कर ली थी। दिहाड़ी मजदूर की बेटी अनिता अरियलुर जिले की रहने वाली थीं। तमिलनाडु स्टेट बोर्ड से बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 अंक के साथ 98 फीसदी नंबर पाने के बावजूद अनिता को नीट में कम नंबर मिले थे। कम अंकों की वजह से उनका मेडिकल में चयन नहीं हो पाया था। अनिता ने मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए नीट को वापस लेने की मांग की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी थी। बीते साल इस पर फैसला आने के बाद वो आत्महत्या कर ली थीं।