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World Science Day: भारत के वो 7 वैज्ञानिक जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया

Fri, 28 Feb 2020 06:34 PM IST
Trainee Trainee एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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national science day 2019 theme - फोटो : Social Media
भारत में कई ऐसे वैज्ञानिक हुए हैं, जिन्होंने अपने आविष्कारों से हमारे देश का नाम न सिर्फ शिखर पर पहुंचाया बल्कि दुनियाभर में भारत को पहचान भी दिलाई। इन वैज्ञानिकों के योगदान को भारत के साथ ही विश्व में भी सराहा जाता है। 28 फरवरी को इन्हीं भारतीय वैज्ञानिकों को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजित किया जाता है। आइए जानते हैं भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों के बारे में जिन्होंने अपनी प्रतिभा से भारत को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई...
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CV Raman - फोटो : Social Media

चंद्रशेखर वेंकट रमन

  • 28 फरवरी 1928 को भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन ने प्रकाश के विवर्तन का शोध दुनिया के सामने पेश किया था। इसे रमन प्रभाव के नाम से भी जानते है।
  • उनकी इस खोज के लिए नोबल पुरस्कार से नवाजा गया था। इनका पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकट रमन था। ये भारत के प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक थे।
  • रमन को 1954 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तिरुचिरापल्ली में हुआ था। रमन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई और पहले अश्वेत व्यक्ति थे।
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होमी जहांगीर भाभा - फोटो : SELF

डॉ. होमी जहांगीर भाभा

  • भारत को परमाणु संपन्न बनाने और पूरी दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में डॉ. होमी जहांगीर भाभा की ही देन है।
  • वर्ष 1909 में जन्मे होमी जहांगीर भाभा ने क्वांटम थ्योरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वह भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे।
  • ब्रिटेन से परमाणु भौतिकी में वैज्ञानिक के रूप में काम करने के बाद स्वदेश लौटे ताकि वे अपने देश को विज्ञान के क्षेत्र में आगे ले जाकर उसे महान बना सकें। 

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जगदीश चंद्र बोस - फोटो : SOCIAL MEDIA

जगदीश चंद्र बसु

  • पौधों में भी जीवन होने को सिद्ध करने वाले जगदीश चंद्र बसु का जन्म 30 नवंबर, 1858 को बिकरामपुर, पश्चिम बंगाल में हुआ था।
  • बोस जीवविज्ञानी और प्रमुख पुरातत्वविद् में से एक हैं।
  • उन्होंने रेडियो और माइक्रोवेव प्रकाशिकी के अध्ययन का बीड़ा उठाया, पौधों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • रेडियो और सूक्ष्म तरंगों का अध्ययन करने वाले जगदीश चन्द्र बसु पहले भारतीय वैज्ञानिक थे।
  • विभिन्न संचार माध्यमों, जैसे- रेडियो, टेलीविजन, रडार, रिमोट सेंसिंग सहित माइक्रोवेव ओवन की कार्यप्रणाली में बसु ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज पूरी दुनिया बोस को मार्कोनी को रेडियो का संयुक्त आविष्कारक मानती है।
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meghnaath saah - फोटो : social media

मेघनाद साहा

  • साहा समीकरण के प्रतिपादक मेघनाद साहा जाने-माने भारतीय खगोलवैज्ञानिक थे।
  • साहा द्वारा प्रतिपादित समीकरण ने तारों में होने वाली विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक अभिक्रियाओं की व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनकी अध्यक्षता में गठित विद्वानों की एक समिति ने भारत के राष्ट्रीय शक संवत के पंचांग का भी संशोधन किया, जो 22 मार्च 1957 से लागू हुआ था।
  • इन्होंने साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान तथा इंडियन एसोसियेशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस नामक दो महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की थी।
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रामानुजन

एम एन रामानुजम

  • दुनिया के महानतम गणितज्ञों में शामिल एम एन रामानुजम जिनकी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मानती है।
  • इनका पूरा नाम श्री निवास रामानुजन था। इनका जन्म 22 दिसंबर, 1887 को तमिलनाडु में हुआ था।
  • रामानुजम ने गणित में कोई औपचारिक पढाई नहीं की थी लेकिन उन्होंने गणितीय विश्लेषण, संख्या सिद्धांत, अनंत श्रृंखला और निरंतर भिन्न अंशों में असाधारण योगदान दिया।
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apj abdul kalam - फोटो : amar ujala

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम

  • इनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम था।
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति (2007 से 2011 तक) और महान वैज्ञानिक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम जिन्हें भारत का मिसाइल मैन भी कहा जाता है।
  • उन्होंने वाहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान और बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई।  
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