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Self-control: ऑनलाइन तनाव के बीच खुद पर नियंत्रण जरूरी, सही दृष्टिकोण से रह सकते हैं मानसिक रूप से मजबूत

Sat, 18 Oct 2025 02:55 PM IST
शाहीन परवीन मार्क फुलमैन, शोधकर्ता, यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स

सार

Mental Strength: डिजिटल दुनिया के बढ़ते शोर में मानसिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं, लेकिन सही दृष्टिकोण, स्पष्ट संवाद और आत्मनियंत्रण से आप अपनी भावनाओं को संभाल सकते हैं और जीवन में शांति बनाए रख सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर( AI Photo) - फोटो : freepik
Self-control: आज तकनीक ने हमें तेज जरूर बना दिया है, लेकिन कहीं न कहीं इस रफ्तार ने हमारी शांति और ध्यान को छीन लिया है। माइक्रोसॉफ्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि एक औसत कर्मचारी दिन भर में सैकड़ों ई-मेल और चैट संदेशों का सामना करता है। इससे उसका दिमाग हरदम व्यस्त और मन थका हुआ महसूस करता है। वहीं छात्रों की पढ़ाई और डिजिटल स्क्रीन के बीच भी संतुलन बिगड़ता जा रहा है। ऐसे में, सबसे बड़ा कौशल है खुद पर नियंत्रण रखना। 

इसी वजह से आज माइंडफुलनेस, डिजिटल डिटॉक्स और बैलेंस्ड लाइफ जैसे शब्द ट्रेंड बन चुके हैं। इस लेख के जरिये कुछ ऐसे ही टिप्स साझा किए जा रहे हैं, जो तनाव, डिजिटल दवाव व मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाते हुए एक स्वस्थ और प्रभावशाली जीवन जीने में मदद करेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर( AI Photo) - फोटो : freepik

नियंत्रण अपने हाथ में रखें

आपको अपने समय और ध्यान पर नियंत्रण रखने पर जोर देना चाहिए। जैसे कई नामचीन कंपनियों में कर्मचारियों को 'क्वाइट आवर्स' यानी शांत समय तय करने की सलाह दी जाती है, वैसे ही आपको भी अपने दिन में कुछ ऐसे घंटे निर्धारित करने चाहिए, जब आप पूरी तरह स्क्रीन और नोटिफिकेशन से दूर रहें। 

ऐसा आप अपने लिए एक 'नो-स्क्रीन जोन' बनाकर कर सकते हैं। इससे थकान कम होती है और प्रदर्शन बेहतर होता है। साथ ही, डिजिटल जीवन पर नियंत्रण रखने से फोकस, ऊर्जा व मानसिक शांति कई गुना बढ़ जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

बातचीत के स्पष्ट नियम बनाएं

टीम या समूह में सफलता की कुंजी है स्पष्ट और समझदारी भरा संवाद। आपको भी टीम के साथ संवाद करने के कुछ बुनियादी सिद्धांत तय करने चाहिए। जैसे-हर चर्चा का स्पष्ट एजेंडा तय करें, उसमें केवल जरूरी लोगों को ही शामिल करें और अनावश्यक बातों में समय न गवाएं। इससे न केवल निर्णय लेना आसान होता है, बल्कि हर सदस्य को यह भरोसा भी रहता है कि उसकी मेहनत व वक्त की कद्र की जा रही है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

सफलता के नए पैमाने तय करें

कई बार आप सफलता को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या तुरंत जवाब देने जैसी चीजों से मापने लगें। यह गलत है। असली उत्पादकता का मतलब है परिणाम और प्रगति, न कि केवल उपस्थिति। आपको अपनी पढ़ाई और प्रोजेक्ट्स में परिणाम तथा उपलब्धि पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ कितने घंटे पढ़े या काम किया इस पर। 

जब आप परिणाम-आधारित सोच अपनाते हैं, तो स्वतंत्रता और जिम्मेदारी, दोनों बढ़ती है। यह मानसिकता सिखाती है कि किसी काम का मूल्य उसकी गुणवत्ता में है, न कि उसमें लगने वाले वक्त में।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

रचनात्मक सोच में खपाएं वक्त

अगर आप किसी काम को करने में एआई की मदद लेते हैं, तो बचने वाले वक्त को फालतू के कामों में लगाने के बजाय गहन और रचनात्मक सोच में लगाना चाहिए। छात्रों को भी एआई का इस्तेमाल रटने या कॉपी-पेस्ट करने के बजाय समय बचाने और कुछ नया सार्थक सीखने में करना चाहिए।

- द कन्वर्सेशन
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