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Sardar Patel Death Anniversary: संगठित भारत के सूत्रधार थे सरदार पटेल, जानिए क्यों कहलाते हैं लौहपुरुष

सार

The Iron Man of India Sardar Vallabhbhai Patel (सरदार वल्लभ भाई पटेल): 15 दिसंबर का दिन हमें द आयरन मैन ऑफ इंडिया यानी सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद दिलाता है। सन् 1950 की यह वही तारीख है जिसने आजाद हिंदुस्तान की एकता के सूत्रधार को भारत और भारतवासियों से सदा-सदा के लिए छीन लिया था। यह उनकी पुण्यतिथि का दिन है।
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सरदार वल्लभ भाई पटेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सरदार वल्लभ भाई पटेल, वह शख्सियत जिसके नाम का स्मरण करने मात्र से ही हर भारतीय गर्वित हो जाता है। अखंड भारत राष्ट्र की संकल्पना आंखों में चमकने लगती है। देश के युवाओं को राष्ट्र की एकता और अखंडता का भान कराने के लिए लौहपुरुष सरदार पटेल का नाम ही काफी है।
15 दिसंबर का दिन हमें द आयरन मैन ऑफ इंडिया यानी सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद दिलाता है। सन् 1950 की यह वही तारीख है जिसने आजाद हिंदुस्तान की एकता के सूत्रधार को भारत और भारतवासियों से सदा-सदा के लिए छीन लिया था। यह उनकी पुण्यतिथि का दिन है।  
31 अक्तूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में जन्मे वल्लभ भाई, देश के ऐसे योद्धा, नेताओं में से एक थे जिन्हें राष्ट्र उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए याद करता है। उन्होंने न केवल भारत के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आजादी के बाद भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरदार पटेल ने ही आजाद भारत को वर्तमान स्वरूप दिया था। मां भारती के मानचित्र पर जब अंग्रेजी हूकुमत ने विभाजनकारी कैंची चलाकर टुकड़े-टुकड़े करने का यत्न किया था, तो सरदार पटेल ने आजादी मिलते हीं पूरे जी-जीन से भारत को एकजुट करने का काम सफलतापूर्वक किया। इसलिए, पूरा राष्ट्र उन्हें देश की एकता का सूत्रधार कहता है। 
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सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी (फाइल फोटो)

पेशे से वकील थे पटेल, गांधी भी मुरीद रहे

पेशे से वकील सरदार पटेल महात्मा गांधी के प्रबल समर्थक थे। स्वाधीनता संग्राम के दौरान 1918 में खेड़ा सत्याग्रह के बाद से महात्मा गांधी के साथ उनका जुड़ाव गहरा हो गया था। यह सत्याग्रह फसल खराब होने के बाद से लैंड रेवेन्यू यानी भू-राजस्व मूल्यांकन के भुगतान से छूट के लिए शुरू किया गया था। इसके लिए पटेल की प्रशंसा में गांधी ने उन्हें श्रेय देते हुए कहा था कि यह अभियान इतनी सफलतापूर्वक (सरदार पटेल के बिना) नहीं चलाया जा सकता था। आंदोलनों के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
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जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल - फोटो : Facebook/Dr K Laxman

बारडोली सत्याग्रह और कांग्रेस की अध्यक्षता 

ब्रिटिश सरकार के भू-राजस्व के आकलन में भारी वृद्धि करने के फैसले के खिलाफ शुरू किए बारडोली सत्याग्रह में भी सरदार पटेल ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे लेकर वे देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए थे। इसके बाद, मार्च 1931 में पटेल ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 46वें सत्र की अध्यक्षता की। इसी अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते की पुष्टि करने का आह्वान किया गया था।  

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सरदार वल्लभभाई पटेल - फोटो : Social media

पटेल ने आजादी के बाद भी अडिग रहकर संघर्ष किया

देश की स्वतंत्रता के बाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल को देश का पहला उप प्रधानमंत्री बनाया गया। उन्हें गृह, राज्य और सूचना एवं प्रसारण विभागों का प्रभार दिया गया। इसके बावजूद वह आजादी का जश्न मनाने की जगह देश की अखंडता और एकजुटता को धार देने में जुटे रहे। उस समय वे आजाद भारत की आजाद रियासतों को भारत में मिलाने का काम बखूबी कर रहे थे। उन्होंने सफलतापूर्वक, 550 से अधिक रियासतों और राजा-रजवाड़ों को एकजुट भारत गणराज्य में शामिल किया। 
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सरदार पटेल और हैदराबाद के निजाम - फोटो : Facebook/Subham Adhikari

हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर का एकीकरण किया

हालांकि, देश के एकीकरण कार्य में पटेल के सामने जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर में जटिल कठिनाइयां भी आईं। एक समय ऐसा था जब हैदराबाद के निजाम ने अपनी रियासत का भारत में विलय करने से इनकार कर दिया था, मगर सरदार पटेल इस मसले को बखूबी अंजाम दिया। वे अपने इरादों पर अडिग थे। उन्होंने सैन्य सहयोग से हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के जटिल मुद्दे को भी सफलतापूर्वक संभाला। 
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI

पटेल के योगदान को मरणोपरांत मिला सम्मान

सरदार वल्लभ भाई पटेल के राष्ट्र के प्रति अतुलनीय योगदान का मूल्य चुका पाना संभव नहीं है। लेकिन फिर भी भारत सरकार ने उन्हें 1991 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा। इतना ही नहीं, भारत सरकार ने 2014 से सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती यानी 31 अक्तूबर का दिन 'राष्ट्रीय एकता दिवस' घोषित किया। इस दिन देश भर में अनेक आयोजन होते हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत का सम्मान करने के लिए, भारत सरकार ने 2018 में गुजरात के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया था। यहां हर साल लाखों सैलानी पहुंचते हैं।
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