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National Education Day: वे छह विश्वगुरु जिनके योगदान को नहीं भूल सकती दुनिया

Mon, 11 Nov 2019 09:02 AM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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मौलाना अबुल कलाम आजाद - फोटो : PIB
11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। ऐसा भारत के पहले शिक्षा मंत्री और भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन पर उनके सम्मान में किया जाता है। साल 2008 में वैधानिक रूप से इसकी शुरुआत हुई। भारतीय समाज में पौराणिक काल से ही शिक्षा और गुरु का बड़ा ही अहम स्थान रहा है। गुरु-चेला पंरपरा सनातन धर्म का आधार रही है। जहां गुरु अपने शिष्यों को कोई शिक्षा या विद्या सिखाते हैं और फिर शिष्य गुरु के रूप में किसी और को शिक्षा देते हैं। शिक्षा दिवस के मौके पर हम आपको बताते हैं विश्व के ऐसे गुरुओं के बारे में, जिनके योगदान को दुनिया कभी नहीं भूल सकती। आगे की स्लाइड्स पढ़ें।
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सर इसाक न्यूटन 
सर इसाक न्यूटन 
सर इसाक न्यूटन एक गणितज्ञ और भौतिक विज्ञान के प्रसिद्ध शिक्षक थे। जिन्होंने दुनिया का परिचय गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतो से कराया। उन्होंने सूर्य और ग्रहों की गति को समझाने के लिए लॉ ऑफ मोशन और गुरुत्वाकर्षण की थ्योरी का उपयोग किया। न्यूटन ने सबसे पहले पता लगाया की सफेद रोशनी असल में 'स्पेक्ट्रम' यानी सात रंगों की रोशनी से मिलकर बनती है। उन्होंने साल 1687 में 'न्यूटनस रिसर्च' के नाम से किताब प्रकाशित की, जो बाद में प्रसिद्ध किताब 'परिनसिपिया' का आधार बनी। इन किताबों ने उस समय दुनिया को सोचने का नया नजरिया प्रदान किया। न्यूटन निश्चित ही दुनिया के सर्वश्रेछ शिक्षकों में से एक हैं।
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pythagoras
पाइथागोरस
पाइथागोरस एक प्रसिद्ध दार्शनिक, गणितज्ञ और शिक्षक थे। उनके सिद्धांत आज भी स्कूलों में सिखाए जाते हैं। उन्हें पाइथागोरस थ्योरम के लिए जाना जाता है। पाइथागोरस को 'फादर ऑफ नंबर' की उपाधि भी दी गई है। उन्होंने गणित और संगीत के बीच संबंध का भी आविष्कार किया था। क्रोटोन में उन्होंने एक गुप्त समाज की स्थापना की, जहां लोगों ने एक संरचित जीवन का पालन किया।

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी हुए। उन्होंने पश्चिमी आलोचकों से हमेशा हिंदू धर्म का बचाव किया और हिंदूओं को समकालीन पहचान दिलाने में भी योगदान दिया। डॉ. सर्वपल्ली ने भारत और पश्चिम देशों में हिंदू धर्म को समझाने में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई, जिससे उन्हें दोनों ही जगहों पर खूब सम्मान मिला। वे भगवद गीता, उपनिषदों और ब्रह्म सूत्र पर अपनी टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते थे। उन्हें साल 1954 में भारत रत्न (भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार) से सम्मानित किया गया था।
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Albert Einstein
अल्बर्ट आइंस्टीन
अल्बर्ट आइंस्टीन एक भौतिक वैज्ञानिक, लेखक और एक शिक्षक थे। उन्हें रिलेटिविटी के क्षेत्र में योगदान के लिए जाना जाता है। अल्बर्ट आइंस्टीन को 'मास एनर्जी इक्वेशन' के लिए भी जाना जाता है, जिसने बाद में एटम बम बनाने वाली सबसे प्रसिद्ध इक्वेशन को जन्म दिया। जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी पर आज भी उनके द्वारा किए गए काम को सराहा जाता है। साल 1921 में आइंस्टीन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

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savitribai phule - फोटो : social media
सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षक और समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्होंने पुरजोर तरीके से आवाज उठाई। फुले ने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 18 स्कूलों का निर्माण कराया। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, विधवाओं की हत्या और महिलाओं के खिलाफ होने वाली सामाजिक कुप्रथा को मिटाने के लिए भी काम किए। 19वीं सदी में केवल वही एकमात्र महिला नेत्री थी, जिन्होंने अपने प्रयासों से कई महिलाओं के जीवन को बदल दिया।

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