भारत के श्रीहरिकोटा से साल 1971 से ही रॉकेट लॉन्च किया जा रहा है। दरअसल, श्रीहरिकोटा को भारत का लॉन्चिंग स्टेशन कहा जाता है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) इस जगह को काफी अहम मानते हैं। इसके पीछे का कारण क्या है, इसके बारे में यहां जानेंगे।
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इसरो के लिए अहम है श्रीहरिकोटा
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- फोटो : इसरो
श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश के तट पर बसा हुआ एक द्वीप है। यहीं भारत का प्राइमरी स्पेसपोर्ट सतीश धवन स्पेस सेंटर है। साल 1969 में श्रीहरिकोटा को भारत का सैटेलाइट लॉन्चिंग स्टेशन के तौर पर चुना गया था। यह जगह इक्वेटर के ज्यादा पास होने के कारण इसरो के लिए काफी अहम माना जाता है।
सैटेलाइट पृथ्वी की परिक्रमा इक्वेटर के पास ही करते हैं और श्रीहरिकोटा इक्वेटर के ज्यादा पास होने के कारण इसरो रॉकेट की लॉन्चिंग यहीं से करता है। इक्वेटर के पास होने के कारण यहां से रॉकेट लॉन्चिंग में पैसों की भी काफी बचत होती है।
श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने का कारण
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- फोटो : Social Media
स्पेसपोर्ट को इंसानों के रहने वाली जगह से दूर तटीय, रेगिस्तान या आइलैंड में बनाया जाता है। दरअसल, कई बार रॉकेट लॉन्च के बाद उसके कई अवशेष धरती पर गिरते हैं, ऐसे में श्रीहरिकोटा समुद्री तट पर स्थित होने के कारण रॉकेट का अवशेष बंगाल की खाड़ी में गिरता है।
मौसम की दृष्टि से देखा जाए तो दस महीने यहां सूखा ही रहता है। इसके अलावा यह जगह पानी से घिरे होने के कारण काफी सुरक्षित रहता है। हालांकि, श्रीहरिकोटा भारत का पहला लॉन्चिंग स्पेसपोर्ट नहीं है, बल्कि केरल में थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन भी है, जहां से भारत का पहला साउडिंग रॉकेट लॉन्च हुआ था।