टीवी पर रामायण सीरियल देखने और रामचरितमानस का पाठ करने वालों ने सुना-पढ़ा होगा कि भगवान श्रीराम के दौर में राम नाम लिखे पत्थर भी पानी पर तैरते थे, जिसे रामसेतु के नाम से जाना जाता है। लंकेश रावण भी पुष्पक विमान में उड़ता था। लेकिन देश की युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति के इस पुरातन विज्ञान को दिनोंदिन भूलती जा रही।
इस ज्ञान-विज्ञान को अविस्मरणीय बनाने के लिए जोर-शोर से प्रयास किए जा रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े हुए प्रसंगों, जिनका धार्मिक ग्रंथ रामायण में मिलता है, पर अध्ययन और शोध कार्य प्रारंभ किए हैं। विश्वविद्यालयों में रामायण से जुड़े विज्ञान को लेकर कई तरह के पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। अब इस कड़ी में एक और नया नाम जुड़ा है वह है मध्य प्रदेश के भोज विश्वविद्यालय का।
हालांकि, मध्यप्रदेश के दो अन्य विश्वविद्यालय भी ऐसे मिलते-जुलते पाठ्यक्रम शुरू कर चुके हैं। विश्वविद्यालयों में छात्रों को रामायण साइंस पढ़ाया जाएगा। छात्र रामचरितमानस की चौपाइयों को पढ़कर देश के पुरातन विज्ञान से परिचित हो सकेंगे।