OYO Rooms के बारे में कौन नहीं जानता। आपने कई जगह OYO Rooms के जरिए होटल बुक किए होंगे। लेकिन क्या आपने कभी इसके संस्थापक की कहानी सुनी है। कैसे एक कॉलेज ड्रॉप आउट इतनी बड़ी कंपनी का मालिक बन गया। कड़ी मेहनत और लगन की मिसाल है इसके संस्थापक की कहानी...
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रितेश अग्रवाल मात्र 23 साल के हैं लेकिन इतनी कम उम्र में ही उन्होंने कई उपलब्धियों को अपने नाम किया है। सबसे बड़ा उदाहरण है उनकी कंपनी OYO Rooms।
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OYO Rooms एक ऐप है जिसके जरिए होटल की बुकिंग की जा सकती है। पूरे भारत में इसके 500 होटलों में 50,000 से भी ज्यादा कमरे हैं।
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OYO Rooms जैसी सफल कंपनी को खड़ा करना इतना आसान नहीं था। कॉलेज छोड़ने के बाद अपनी खुद की कंपनी खोलने के लिए रितेश ने कड़ी मेहनत की है।
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एक वक्त ऐसा भी था जब दिल्ली में मकान मालिक ने उन्हें अपने घर में घुसने भी नहीं दिया था। उन्हें कई दिनों तक उसी घर की सीढ़ियों पर रात बितानी पड़ी।
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लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी। मेहनत करने में वह हमेशा से यकीन रखते थे। 8 साल की उम्र में ही रितेश ने साफ्टवेयर कोडिंग शुरू कर दी थी। 16 साल की उम्र में उन्हें 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' के 'एशियन साइंस कैंप' के लिए चुना गया।
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जब रितेश 17 साल के हुए, तब उन्होंने बेस्ट सेलिंग किताब लिखी। 'दी इंसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन इंजीनियरिंग कॉलेज' नाम से उनकी किताब काफी लोकप्रिय रही। इसी साल वह भारत के सबसे युवा सीइओ भी बने। उनकी कंपनी 'वर्थ ग्रोथ पार्टनर्स' ज्यादा सफल नहीं रही।
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रितेश ने 18 साल में 'ओरावल' नाम से कंपनी खोली। इसी कंपनी का नाम आगे जाकर उन्होंने OYO Rooms कर दिया। रितेश भारत से 'थील फेलोशिप' के लिए चुने जाने वाले इकलौते शख्स हैं। उन्हें फोर्ब्स ने अपने '30 अंडर 30' उद्यमियों में भी शामिल किया।