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चांद पर हो गई रात, लेकिन इस दिन विक्रम को फिर से ढूंढेगा इसरो

Sat, 21 Sep 2019 03:19 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान (ग्राफिक्स) - फोटो : isro
चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर (Chandrayaan 2 Vikram Lander) को चांद की सतह पर उतरे 14 दिन बीत चुके हैं। अब चांद पर रात भी हो चुकी है। यानी विक्रम लैंडर अब अंधेरे में जा चुका है। इस दौरान चांद पर तापमान माइनस 180 सेल्सियस तक चला जाएगा। हमारे विक्रम लैंडर को भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इस ठंडे मौसम का सामना करना पड़ेगा।

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चांद पर होती रात और लाल घेरे में विक्रम लैंडर की लैंडिंग साइट (फाइल फोटो) - फोटो : एंड्रयू जोन्स
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Reseach Organisation) के अनुसार, आंकड़ों के विश्लेषण में पता चला है कि विक्रम करीब 200 किमी की रफ्तार से चंद्रमा की सतह पर टकराया। ऑर्बिटर ने विक्रम की जो तस्वीरें भेजी हैं, उन्हें देख कर ऐसा लग रहा है कि विक्रम के दो पांव चांद की सतह में धंस गए हैं। ये भी हो सकता है कि वो पांव मुड़ गए हों। या फिर वो एक करवट गिरा पड़ा है। ऐसा तेज गति में टकराने के कारण हुआ है। माना जा रहा है कि ऑटोमेटिक लैंडिंग प्रोग्राम में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ है।
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इसरो प्रमुख के. सिवन - फोटो : ANI
इधर इसरो अध्यक्ष के. सिवन (ISRO Chief K Sivan) ने कहा है कि हम इन 14 दिनों में विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं साध पाए और अब इसकी उम्मीद भी नहीं है। क्योंकि चांद पर रात के दौरान माइनस 180 डिग्री तापमान में विक्रम के उपकरणों का सही हालत में रहना संभव नहीं है। उसमें जितनी एनर्जी दी गई थी, उसकी समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है। वहां उसे रीचार्ज करने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। 

फिर भी की जाएगी संपर्क की कोशिश, आगे पढ़ें कब?

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विक्रम लैंडर (ग्राफिक्स) - फोटो : ISRO
इसरो के एक अधिकारी का कहना है कि चांद पर रात के दौरान बेहद कम तापमान में चंद्रयान-2 के लैंडर और रोवर के उपकरण सक्रिय नहीं रहेंगे। हालांकि उसे सक्रिय रखा जा सकता था, अगर उसमें आइसोटोप हीटर लगा होता। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद अगले लूनर डे पर विक्रम से एक बार फिर संपर्क की कोशिश की जाएगी। यह लूनर डे 7 से 20 अक्टूबर तक रहेगा। इसरो विक्रम से 14 अक्तूबर को संपर्क करने की कोशिश करेगा।

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आगे पढ़ें, ऑर्बिटर के बारे में भी इसरो अध्यक्ष ने कही बड़ी बात

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चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर (ग्राफिक्स) - फोटो : ISRO
इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया कि हम विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने में सफल नहीं हो पाए। लेकिन चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर बिल्कुल सही और अच्छा काम कर रहा है। इस ऑर्बिटर में कुल आठ उपकरण लगे हैं। हर उपकरण का अपना अलग-अलग काम निर्धारित है। ये सभी उस काम को बिल्कुल उसी तरह कर रहे हैं जैसा प्लान किया गया था।

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