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National Youth Day 2022: कम उम्र में ही दिखाई अपनी प्रतिभा, सफलता हासिल कर बढ़ाया देश का गौरव

Wed, 12 Jan 2022 07:09 AM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत में आज भी ऐसे युवा हैं, जो बेहद कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बना कर देश को गौरव दिला चुके हैं। अमर उजाला आपको बता रहा है ऐसे ही कुछ युवाओं के बारे में।
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National Youth Day 2022 - फोटो : Amar Ujala Graphics
12 जनवरी का दिन देश के लिए बेहद खास है। आज भारत के महान दार्शनिक और समाजसेवी स्वामी विवेकानंद जी की 159वीं जयंती है। इस दिन को देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। बेहद कम उम्र में ही स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा की पहचान करा दी थी। साल 1893 में अमेरिका के शिकागो में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण को कौन ही भूल सकता है। अनेक युवाओं ने उनसे प्रेरणा लेते हुए बड़े मुकाम हासिल किए हैं। भारत में आज भी कई ऐसे युवा हैं, जो बेहद कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बना कर देश को गौरव दिला चुके हैं। अमर उजाला आपको बता रहा है ऐसे ही कुछ युवाओं के बारे में, जिन्होंने बेहद कम उम्र में सफतला के झंडे गाड़ कर देश का नाम रौशन किया है..
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National Youth Day 2022 - फोटो : Social Media

नीरज चोपड़ा: टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक विजेता

साल 2021 में देश में नीरज चोपड़ा से अधिक चर्चा शायद ही किसी अन्य शख्स की हुई हो। महज 23 साल की आयु में ही टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक जीत कर उन्होंने देश को सम्मान दिलाया है। यह जीत इसलिए भी खास थी, क्योंकि ओलंपिक के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक को अपने नाम किया। हरियाणा के रहने वाले नीरज ने भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में यह कीर्तिमान बनाया। आज नीरज दुनियाभर के उन करोड़ों लोगों की प्रेरणा बन चुके हैं, जो अपने देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। इससे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 
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National Youth Day 2022 - फोटो : Social Media

अवनि लेखरा: टोक्यो पैरालंपिक 2020 में स्वर्ण पदक विजेता 

अगर मन में कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो तो कोई भी समस्या आपका रास्ता नहीं रोक सकती। इस बात को साबित किया है राजस्थान की अवनि लेखरा ने। 20 वर्ष की दिव्यांग निशानेबाज ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। अवनि लेखरा 10 मीटर एयर रायफल स्टैडिंग एसएच-1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। इसके अलावा उन्होंने इसी पैरालंपिक में 50 मीटर थ्री पोजिशन एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता था। 11 साल की उम्र में एक कार हादसे में उनकी कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। उन्होंने इस हादसे से हिम्मत न हारते हुए बड़ा मुकाम हासिल किया। उनकी यह जीत देश के युवाओं और खासकर दिव्यांगों के लिए एक अहम प्रेरणा साबित हो रही है। 

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National Youth Day 2022 - फोटो : Social Media

लिसिप्रिया कंगुजम: पर्यावरण कार्यकर्ता

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की लिसिप्रिया कंगुजम दुनिया की सबसे कम उम्र (10 वर्ष) की पर्यावरण कार्यकर्ताओं में से एक हैं। लिसिप्रिया को साल 2019 में किड्स-राइट्स फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रन अवॉर्ड और भारत शांति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। बेहद कम उम्र में ही लिसिप्रिया पर्यावरण संरक्षण के लिए काफी मुखर हैं। उन्होंने साल 2019 में स्पेन में आयोजित कॉप-25 (COP25) जलवायु सम्मेलन को संबोधित किया था और दुनियाभर के नेताओं को जल्द से जल्द जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने की बात कही थी। इतनी कम उम्र में ही इन मुकाम को हासिल कर चुकीं लिसिप्रिया कंगुजम आज कई लोगों की प्रेरणा हैं। वह यह साबित कर रही हैं कि प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। 
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National Youth Day 2022 - फोटो : Social Media

रितेश अग्रवाल: ओयो के संस्थापक

देश में आज 'ओयो' का नाम कौन ही नहीं जानता। आम लोगों को ठहरने के लिए अच्छे और किफायती कमरों की व्यवस्था करवाने में आज इस कंपनी का अहम योगदान है। इस कंपनी के संस्थापक ओडिशा के 28 वर्षीय रितेश अग्रवाल हैं। रितेश दुनिया के सबसे युवा अरबपतियों में से एक हैं। उन्हें बिजनेस वर्ल्ड का यंग एंटरप्रेन्योर अवॉर्ड भी मिल चुका है। उनकी कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2020 की हूरून रिच लिस्ट के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 7,253 करोड़ रुपये थी। शुरुआती पढ़ाई अपने गांव से करने के बाद रितेश ने इंडियन स्कूल ऑफ़ बिजनेस अकादमी में प्रवेश लिया था। हालांकि, उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। रितेश ने अपनी पहली कंपनी OREVAL STAYS को केवल 19 वर्ष की उम्र में ही शुरू किया था। कई बार असफलता हाथ लगने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और इस मुकाम को हासिल किया। आज ओयो भारत के अलावा विदेशों में भी अपनी जगह बना चुकी है। देश के जो भी युवा आज स्टार्टअप का सपना देखते हैं, उनके लिए रितेश एक प्रेरणा की तरह हैं। 
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National Youth Day 2022 - फोटो : Social Media

स्वाति शर्मा: वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में लीगल ऑफिसर

29 साल की स्वाति शर्मा आज देश के युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए एक प्रेरणा की तरह बनकर सामने आई हैं। स्वाति का चयन जेनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ यानी वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में लीगल ऑफिसर के तौर पर हुआ है। राजस्थान के छोटे से शहर झुंझुनूं के काजड़ा गांव की रहने वाली स्वाति एक हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़कर निकली हैं। उन्होंने गैर-लाभकारी युवा संगठन, एचएलई फाउंडेशन (हमारा हक) की स्थापना की थी। उन्होंने बाल अधिकार, भूमि स्वामित्व अधिकार, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, एलजीबीटी अधिकार, पुन: उत्पादक अधिकार और पर्यावरण और श्रम अधिकार के क्षेत्र में भी कई कार्य किए हैं। इसके अलावा उन्होंने इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यवसाय कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और कई अन्य विदेशी संस्थानों से भी पढ़ाई की है। आज देश के युवा और खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।


 
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