जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना
1920 में उन्हें यूपी के अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना के लिए फाउंडेशन कमेटी के सदस्य के रूप में चुना गया था। उन्होंने 1934 में विश्वविद्यालय परिसर को अलीगढ़ से नई दिल्ली स्थानांतरित करने में भी सहायता की। अब परिसर के मुख्य द्वार का नाम उनके नाम पर रखा गया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की स्थापना, 1951 में प्रथम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और 1953 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की।
उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान या आईआईएससी बैंगलोर की स्थापना पर जोर दिया। पहले भारतीय शिक्षा मंत्री के रूप में आजाद का मुख्य ध्यान स्वतंत्रता के बाद के भारत में ग्रामीण गरीबों और लड़कियों को शिक्षित करना था। शिक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने वयस्क साक्षरता, 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा, और माध्यमिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया।
इन शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना
आजाद ने कई शैक्षणिक संस्थानों- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), माध्यमिक शिक्षा आयोग, अन्य निकायों की स्थापना में योगदान दिया है। उनके कार्यकाल में जामिया मिलिया इस्लामिया और 1951 में पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी खड़गपुर खड़गपुर जैसे संस्थानों की स्थापना की गई। वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की स्थापना में शामिल थे।
16 जनवरी 1948 को अखिल भारतीय शिक्षा पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमें एक पल के लिए भी नहीं भूलना चाहिए, कम से कम बुनियादी शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसके बिना वह एक नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी तरह से निर्वहन नहीं कर सकता है। उन्होंने IIT की क्षमता में विश्वास किया और कहा, 'मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस संस्थान की स्थापना देश में उच्च तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान की प्रगति में एक मील का पत्थर बनेगी।