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निजी विवि सुधार सकते हैं शिक्षा की दशा और दिशा : डॉ0 सहस्रबुद्धे

Thu, 23 May 2019 05:16 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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  •  मंगलायतन विवि में सातवां दीक्षांत समारोह सम्पन्न
  •  742 विद्यार्थियों को प्रदान की गई डिग्रियां

अलीगढ़। मंगलायतन विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षांत समारोह आज सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ0 विनय सहस्रबुद्धे राज्य सभा सदस्य और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, आईसीसीआर के अध्यक्ष ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत कई चुनौतियों का समाना कर रहा है। अभी दुविधा की स्थिति बनी हुई है। शिक्षा को हमने जीविका का माध्यम बना लिया है। अभी भी लाखों स्नातक अपने विषय की गहराई को नहीं समझ पाये हैं।
         
राजनीतिक विचारक श्री बुद्धे ने कहा कि मंगलायतन विवि जैसे निजी विवि सरकारी नीतियों से बंधे नहीं हैं। वे स्वतंत्र हैं और शिक्षा की दिशा में अच्छे प्रयास करके उसकी दशा में सुधार कर सकते हैं। इन विश्वविद्यालयों में ऐसे कोर्स प्रारंभ करने की आवश्यकता है, जिनमें प्रयोग और शोध की अधिकता होगी। इससे विद्यार्थी कुशलता प्राप्त करेंगे। इससे शिक्षा को हम अंधकार से प्रकाश की ओर ले जायेंगे। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं है बल्कि हुनर का विकास करके जीविका का साधन बनाना है और सही तरीका आय का माध्यम बन सकता है। दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज वे ऐसे मुकाम पर हैं। जहां वे चार वर्ष पहले नहीं थे। क्षितिज की ओर अग्रसर होते हुए स्वयं आत्म चिंतन करेंगे तो उन्हें सकारात्मक उत्तर मिलेगा। तभी इस डिग्री की सफलता है। यह समारोह विद्यार्थियों को जिंदगी को समझने की ताकत देगा।
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अध्यक्षीय भाषण में प्रो0 अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि 21वीं सदी का भारत बदल रहा है। प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी का विकास तेजी से हो रहा है। यह अवधि चैथी औद्योगिक क्रांति की होगी । यह भारत के लिए एक नया अध्याय होगा। हम एक विकसित समाज की ओर अग्रसर होंगे और निर्धनता को समाप्त करके शिक्षा स्वास्थ्य ग्रह और उर्जा को सबके लिए उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखेंगे। मंगलायतन विवि के दीक्षांत समारोह में स्नातक उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों आशीर्वाद देते हुए, उन्होंने कहा कि युवाओं की उर्जा और जोष एक दृढ़ नींव के साथ प्रभावी आधारशिला निर्मित करती है जो एक व्यक्ति को सफलता के शिखर पर ले जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे बड़े स्वप्न देखें। उच्च लक्ष्य बनायें और इन्हें प्राप्त करने के लिए जोखिम लेना सीखें। सफलता प्राप्त करने के लिए यही कुछ समय उचित है। विजीटर श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि मंगलायतन विवि की अपनी एक विशेष पहचान है जो ग्रामीण बुद्धिशीलता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहा है। जिसका प्रभाव यहां के सामाजिक विकास और अर्थ व्यवस्था पर प्रतिबिंबित हो रहा है। विवि मूल्य षिक्षा पर बल देता है जो एक उच्च नैतिक आदर्शो को बल देता है। विवि परिसर में मंदिर होने से एक सकारात्मक उर्जा का सृजन होता है।  
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कवि डॉ0 कुमार विश्वास ने मानद डी.लिट की उपाधि प्राप्त करने के बाद दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कैसी बिडम्वना है कि पाष्चात्य देष मंगल में जीवन ढ़ूंढ रहे हैं और हमारा देश जीवन में मंगल तलाश रहा है। सरस्वती के वरद पुत्र श्री विष्वास ने धर्म शास्त्र का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रजा को राजा से मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी। पर आज स्थिति उलट है।  इस पर गहराई से विचार करना होगा। आज की शिक्षा क्लास रूम लंर्निंग नहीं है। अब परिथितियां बदल चुकी हैं।  शिक्षा को संस्कार से बाहर नहीं निकाला जा सकता है। यह डिग्री एक अच्छा नागरिक बनने के लिए है।

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दुबई केयर के कार्यकारी अधिकारी तारिक.अल.गुर्ग ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि उनका संगठन 57 देशों में 90 लाख बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कर रहा है। हम पूरी तरह से शिक्षा को समर्पित हैं। उन्होंने बताया कि मैने भारतवासियों से बहुत कुछ सीखा है। बैंकिंग में नौकरी के दौरान मेरे अधिकांष अधिकारी भारतीय थे और मैं हिंदी भी बोल सकता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए दुबई और भारत में कोई अंतर नहीं है। इनको भी डी.लिट की मानद उपाधि दी गई। कुलपति प्रो0 केवीएसएम कृष्णा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसमें विवि के उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगारपरक षिक्षा प्रदान करने की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। आगामी शिक्षा सत्र से रोजगारपरक कोर्स जिनमें मीडिया एवं फाइन आर्ट्स में एनिमेंशन एंड ग्राफिक्सए डिजीटल आर्ट विशेष रूप से उल्लेखनीय है। पत्रकारिता विभाग द्वारा सर्टिफिकेट कोर्स जैसे फिल्म मैंकिंगए आरजेइंगए एंकरिंगए डायरेक्शन कान्टेंट राइटिंगए एडवरटाइजिंग व पीआर के अलावा और भी कोर्स जैसे एग्रीकल्चर स्कूल ऑफ फार्मेसी आदि।
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विभिन्न विभागों द्वारा शुरू हो रहे हैं। उन्होनें अतिथियों के बारे में भी अपने विचार प्रकट किये। समारोह का संचालन कुलसचिव प्रो0 शिवाजी सरकार और डॉ0 हिरा दिलशाद ने किया। बोर्ड ऑफ गर्वनेंस के चेयरमैन हेमंत गोयल ने अतिथियों को प्रतीक चिहन और प्रोट्रेट भेंट किये। मंच पर गुरूदेव ऋषिराज भी मौजूद रहे। समारोह में पूर्व चांसलर गोपाल दास नीरज को एक मिनट का मौन रख कर श्रृद्धांजलि दी गई। दीक्षांत समारोह में 742 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 35 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 41 विद्यार्थियों को रजत पदक प्रदान किये गए। तीन पीएचडी के छात्रों को भी डिग्री प्रदान की गई। सभी संस्थानों के डीन और प्रिंसीपल प्रो0 आरिफ सुहेल, प्रो0 विकास कौशिक,  प्रो0 जयंती लाल जैनए प्रो0 शिवाजी सरकार, डॉ0 लाल रत्नाकर ने विभागों के डिग्री धारकों को प्रस्तुत किया। समारोह के आयोजन में वित्त अधिकारी अतुल गुप्ता, प्रो0 अली आर फतेही, डॉ0 दिनेश पांडेय,  परीक्षा नियंत्रक डॉ0 दिनेश शर्मा,  डॉ0 राजीव शर्मा,  महेश कुमार, डॉ0 मनोज राणा, प्रो0 आरके शर्मा,  डॉ0 राहुल गोयल, डॉ0 अंकुर अग्रवाल, डॉ0 सौरभ सिंह, डॉ0 वाई पी सिंह, डॉ0 अनुराग शाक्य, डॉ0 पूनम रानी, प्रशासनिक अधिकारी गोपाल राजपूत, मनीषा उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुलश्रेष्ठ, इंजी0 सोनी सिंह, लीना द्रुवा, उमेश शर्मा, अलीशा चौधरी, डॉ0 गौरव गर्ग, देबाशीष  चक्रवर्ती, विलास पालके, उन्नति जौदान, अनुभव सोनी, दीक्षा यादव, प्रतिमा सिह, प्रवीन भारद्धाज, मोहन माहेश्वरी, लव मित्तल, आशीष जैन, मयंक जैन, शिशुपाल सिंह,  विजया सिंह, प्रभाकर शुक्ला, विशाल उपाध्याय, अमित उपाध्याय, हरित प्रियदर्शी, किंशुक, आर श्रीनिवासन, कुंदन शर्मा, दिव्यांश जैन आदि का सहयोग रहा।
 
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चित्र परिचय - 
1 - दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्य्रकम की शुरुआत करते कार्यक्रम के मुख्यथिति डॉ0 विनय सहस्रबुद्धे
2 - छात्राओं को गोल्ड मैडल देकर सम्मानित करते कार्यक्रम के मुख्यथिति डॉ0 विनय सहस्रबुद्धे
3 - दुबई केयर के कार्यकारी अधिकारी तारिक अल गर्ग को मानद डी.लिट की उपाधि देते मंविवि के विजिटर प्रो0 अच्युतानंद मिश्र
4 - कवि डॉ0 कुमार विश्वास को मानद डी.लिट की उपाधि देते मंविवि के विजिटर प्रो0 अच्युतानंद मिश्र

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