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15 साल की उम्र में बना एथिकल हैकर, गूगल-याहू जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां लेती हैं सलाह

Sun, 17 Mar 2019 04:06 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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कंप्यूटर में मेरी दिलचस्पी बहुत कम उम्र में हो गई थी। इनसे लगाव के चलते मैंने दसवीं की भी पढ़ाई पूरी नहीं की और 15 साल की उम्र में एथिकल हैकर बन गया। सब मैंने अपने आप सीखा। यू-टूयब और वेबसाइट से जरूर कुछ चीजें समझी। किसी ने हैकिंग के दांव-पेंच नहीं बताए। मैं पायरेसी के विरुद्ध और कंप्यूटरों पर वायरसों के हमलों तथा डाटा चोरों के खिलाफ लड़ता हूं। इसमें मैं पिछले दस साल से देश भर की पुलिस, सीआईडी, सीबीआई से लेकर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की मदद कर रहा हूं।
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उनकी वेबसाइटों को सुरक्षित रखने से लेकर दुश्मनों के हमले से बचाता रहा हूं। मैं बैंकों की मदद करता हूं और इधर फिल्मों की पायरेसी को रोकने के लिए भी प्रोड्यूसरों-डायरेक्टरों की सहायता कर रहा हूं। सरकार से हैकरों के विरुद्ध लड़ाई में मैं कोई फीस नहीं लेता और पुलिस से भी मैंने कभी कुछ नहीं लिया। पुलिस के कई विभागों को मैंने हैकरों के विरुद्ध सुरक्षा करना तथा लड़ना सिखाया। स्कूल-कॉलेज के छात्रों को भी हैकिंग के विरुद्ध ट्रेनिंग देता रहा हूं। फिर 2015 में मैंने अपनी कंपनी बनाई।
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जिसमें 70 लोगों की टीम है, जो हैकरों से लड़ती है। हमारा काम है सरकारी साइटों पर नजर रखें और किसी कमी या कमजोरी के दिखने पर सरकार को रिपोर्ट करें। हैकरों के हमले रोकें। मैं गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, याहू जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सलाहकार की भूमिका भी निभा चुका हूं। आज की ऑनलाइन दुनिया में सरकार या निजी कंपनियों के पास लोगों का डेटा कीमती पूंजी बन चुका है। अतः सभी को हैकरों के विरुद्ध सुरक्षा की जरूरत है।

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लोग पूछते हैं कि डेटा चोरी क्या है और इससे क्या नुकसान है? असल में सरकार और निजी कंपनियों के पास आज आपका अधार नंबर, इनकम टैक्स खाता, बैंक खाता नंबर, घर-दफ्तर के पते, फोन नंबर, एटीम कार्ड्स के नंबर और फिंगर प्रिंट तक सब डेटा रूप में मौजूद हैं। साइबर अपराधी ये डेटा चुरा कर किसी भी व्यक्ति की पहचान का ‘क्लोन’ बना, आसानी से गलत इस्तेमाल करते हैं। इसलिए डेटा चोरी संवेदनशील मामला है।
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‘क्लोन’ से आपका बैंक अकाउंट बन सकता है, मोबाइल कनेक्शन लिया जा सकता है। फेसबुक-इंस्टाग्राम अकाउंट्स बनाए, संचालिए किए जा सकते हैं। पोर्न वर्ल्ड में आपका ‘क्लोन’ बनाया जा सकता है। देश में 70 फीसदी लोगों को साइबर अपराधों की जानकारी नहीं हैं और वे अपराधियों के शिकार बन जाते हैं। देश पूरी तरह डिजिटल होने की तरफ बढ़ रहा है। अतः खतरा भी बढ़ रहा है। इसमें संदेह नहीं कि हम सुरक्षा के उपाय कर रहे हैं। लेकिन हमलावर भी चुप नहीं बैठते।
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वे नए-नए वायरस बनाते और डेटा चोरी के रास्ते निकालते हैं। इसलिए आज साइबर सिक्योरिटी चौबीसों घंटे की जरूरत है। जैसे सीसीटीवी आप चौबीसों घंटे चालू रखते हैं। अभी मुश्किल यह है कि कंपनियां डेटा चोरी होने के बाद जागती हैं। भारत के डिजिटलीकरण से हैकरों के हमले भी बढ़े हैं, इसलिए हमें अन्य सुरक्षा उपायों की तरह साइबर सिक्योरिटी पर भी फोकस करना पड़ेगा। पीएम नरेंद्र मोदी लगातार कह रहे हैं कि साइबर वर्ल्ड को 10 फीसदी अपनी सुरक्षा पर खर्च करना चाहिए।
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