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JNU मामला: कितना सही है छात्रों का विरोध प्रदर्शन, कैसे कम हो सकती है फीस

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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
पिछले कई दिनों से दिल्ली स्थित जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध है हॉस्टल की बढ़ी फीस का।

जेएनयू ने फीस को लेकर नए नियम जारी किए हैं, जिसके बाद एक सीटर कमरे का मासिक किराया 20 रुपये से बढ़कर 600 रुपये हुआ और दो लोगों के लिए कमरे का किराया 10 रुपये से बढ़कर 300 रुपए। साथ ही हर महीने 1700 रुपये का सर्विस चार्ज भी लिए जाने का ऐलान हुआ। ये तो उन छात्रों के लिए जो आर्थिक कमजोर वर्ग (EWS) से आते हैं। सामान्य वर्ग के लिए यह और ज्यादा है। 

इसे लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आगे की स्लाइड्स से आप खुद समझ सकते हैं कि छात्रों विरोध प्रदर्शन कितना सही है और कितना नहीं?
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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
जेएनयू के नए नियमों के मुताबिक कम से कम 3,350 रुपये हर महीने एक ईडब्लूएस वर्ग के छात्र को देना है। इसके अलावा मेस फीस अलग और बिजली, पानी और रख-रखाव का चार्ज अलग।

एक छात्र का खर्च कितना बढ़ा?

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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
  • बीबीसी ने जेएनयू में एमफिल कर रहे एक छात्र से बात की, जिनके परिवार की कमाई 12 हजार से कम होने की वजह से उन्हें 5 हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलती है।
  • उनकी ऐवरेज मेस फीस है तकरीबन 3 हजार रुपये महीना है। अब इसमें 3350 और जोड़ दीजिए और साथ में बिजली-पानी और रख-रखाव का खर्च।
  • तो ये कुल खर्च उनकी स्कॉलरशिप से ज्यादा हो जाता है। एक छात्र के खर्च में इन सबके अलावा किताबें और दूसरी जरूरी चीजें भी होंगी। हर सेमेस्टर में इस्टेबलिशमेंट चार्ज भी है और कुछ सालाना फीस अलग।

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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
छात्रों के प्रदर्शन के बाद इसमें बदलाव ये हुआ कि 12,000 से कम पारिवारिक कमाई वाले छात्रों के हॉस्टल रूम का खर्च आधा यानी 300 और 150 रुपये कर दिया गया। सरकार ने इसे 'मेजर रोलबैक' यानी 'भारी कटौती' के तौर पर पेश किया।

कितने छात्र होंगे प्रभावित?

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jnu student protest - फोटो : पीटीआई
  • अगर जेएनयू की वेबसाइट पर 2017-18 की आधिकारिक सालाना रिपोर्ट देखें, तो उस सत्र में 1,556 छात्रों को एडमिशन दिया गया था। जिनमें से 623 ऐसे छात्र थे जिनके परिवार की मासिक आय 12,000 रुपये से कम है। यानी 40 फीसदी ऐसे छात्र आए।
  • 12,0001 रुपये से ज्यादा कमाई वाले परिवारों से 904 छात्र आए। मतलब ये आय 20 हजार रुपये महीना भी हो सकती है और 2 लाख महीना भी। इनमें से 570 बच्चे सरकारी स्कूलों से पढ़ कर आए थे। यानी 36 फीसदी।
  • फीस बढ़ोतरी के विरोध में जेएनयू का एबीवीपी छात्र संगठन भी शामिल है। हालांकि वे बाकी छात्रों के प्रदर्शन से सहमत नहीं हैं।

जेएनयू पर कितना आर्थिक बोझ?

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
  • जेएनयू प्रशासन ये कहता है कि कमरों के किराये तीन दशक से नहीं बढ़े थे। बाकी खर्च एक दशक से लंबे समय से नहीं बढ़े थे। इसलिए ये कदम जरूरी था।
  • हालांकि पिछले साल पीटीआई में छपी रिपोर्ट बताती है कि हॉस्टल रूम के अलावा बाकी फीस बढ़ी है।
  • लेकिन समस्या ये है कि ज्यादातर केंद्रीय विश्वविद्यालय फंड की कमी से जूझ रहे हैं। छात्रों की फीस से जो कमाई होती है वो कुल खर्च का 2-3 फीसदी ही होता है।

क्या कहती है जेएनयू की रिपोर्ट

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jnu student protest - फोटो : हिमांशु सोनी
  • जेएनयू की 2017-18 की रिपोर्ट देखी जाए तो छात्रों की फीस से महज 10 करोड़ ही आए। 
  • उस साल यूनिवर्सिटी की कुल कमाई 383 करोड़ थी और खर्च हुए 556 करोड़। यानी 172 करोड़ का गैप। 
  • इसे कैसे पूरा किया जाए, इसका सफल मॉडल ये विश्वविद्यालय अपने रिसर्च से नहीं निकाल पाए हैं।
  • हालांकि कुछ और खर्चों पर नजर डाली जाए, तो पता चलता है कि जेएनयू में लाइब्रेरी का खर्च कम कर दिया गया है। लेकिन सिक्योरिटी पर खर्च 2017-18 में 17.38 करोड़ रुपये रहा, जो उससे पिछले साल 9.52 करोड़ था।

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jnu student protest - फोटो : पीटीआई
  • इस साल केंद्र के बजट से भी जीडीपी का 4.6 फीसदी ही शिक्षा के लिए मिला। जबकि जानकार कहते हैं कि ये कम से कम 6 फीसदी होना चाहिए।
  • साल 2019-20 के लिए यूजीसी का बजट भी घटा है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) का बजट भी घटा है। आआईटी (IIT) और आईआईएम (IIM) का बजट भी काफी घटा है।
  • लेकिन ये भी सच है कि केंद्रीय बजट का ज्यादातर हिस्सा इंजीनियरिंग और टेक्निकल संस्थानों में जा रहा है। बाकी संस्थानों को उस बजट का कम हिस्सा मिल रहा है।

क्या जेएनयू इसका हल खोज सकता है?

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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
  • कई आईआईटी संस्थान अपनी कमाई को बढ़ाने का एक प्रयोग अपने यहां कर रहे हैं।
  • वे अपने संस्थान से पढ़कर निकले पुराने छात्रों से पैसा जुटा रहे हैं। जैसे आईआईटी बॉम्बे ने 1993 के बैच से 25 करोड़ जुटाए। आईआईटी मद्रास ने 220 करोड़ इसी तरह जुटाए।
  • उन्होंने दूसरे देशों में दफ्तर भी खोले हैं, ताकि पुराने छात्रों से संबंध बढ़ाए जा सकें।
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jnu student protest - फोटो : विवेक निगम
  • क्या ऐसा ही जेएनयू और बाकी संस्थानों में भी संभव है, ये तो शोध का विषय है।
  • लेकिन जेएनयू समेत बाकी विश्वविद्यालयों में खर्च और कमाई के बीच का अंतर कम करने के लिए अगर जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो ये फीस वृद्धि आगे होती ही रहेगी।
  • सवाल ये भी है कि क्या सिर्फ फीस वृद्धि से ये अंतर कम हो सकेगा?
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