देश के 23 आईआईटी संस्थानों में बीटेक कोर्स में प्रवेश लेने के लिये विद्यार्थियों के रुझान में निरंतर गिरावट आ रही है। पिछले तीन वर्ष के आंकडों की पडताल करें तो पता चलता है कि इस वर्ष जेईई-मेन परीक्षा से चयनित 83,681 परीक्षार्थियों ने जेईई-एडवांस्ड परीक्षा देने में रुचि नहीं दिखाई। इस वर्ष अप्रैल में 9,35,471 विद्यार्थियों ने जेईई-मेन के लिये पंजीयन करवाया था, उनमें से 8,74,469 ही परीक्षा देने पहुंचे।
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जेईई-मेन, 2019 से शीर्ष रैंक वाले 2.45 लाख परीक्षार्थियों को जेईई-एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए क्वालिफाई घोषित किया। लेकिन इनमें से 1.73 लाख ने ही पंजीयन करवाया। उसके बाद 27 मई को मात्र 1,61,319 परीक्षार्थी ही जेईई-एडवांस्ड के पेपर देने पहुंचे।
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आईआईटी रुड़की द्वारा आयोजित जेईई-एडवांस्ड, 2019 के रिजल्ट में इस वर्ष 38,705 विद्यार्थियों को काउंसलिंग के लिये पात्र घोषित किया गया है। जिसमें 33,349 छात्र तथा 5356 छात्राएं शामिल हैं। जबकि गत वर्ष 1.52 लाख परीक्षार्थियों में से 31,988 को क्वालिफाई घोषित किया गया था। ये विद्यार्थी 23 आईआईटी संस्थानों की 12,069 से अधिक सीटों के लिये काउंसलिंग प्रक्त्रिस्या में भाग लेंगे। ये सीटें गत वर्ष की हैं, जिसमें गर्ल्स कैटेगरी के लिए आरक्षित 80 सीटें भी शामिल थीं। इस वर्ष गर्ल्स कैटेगरी एवं ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 10 प्रतिशत रिजर्वेशन की अतिरिक्त सीटें और बढ़ जाएंगी।
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इसलिये घट रही है रूचि
सूत्रों ने बताया कि 23 आईआईटी में फैकल्टी की निरंतर कमी, नए आईआईटी में आधारभूत सुविधाओं व संसाधनों की कमी के चलते अच्छे प्लेसमेंट नहीं होने से विद्यार्थी नई आईआईटी से बीटेक करने को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। इसकी तुलना में वे पुराने एनआईटी से मनपसंद ब्रांच में बीटेक करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष 83,681 (34.15 प्रतिशत) विद्यार्थियों का आईआईटी जैसे संस्थानों से मोहभंग हो जाना विंचारणीय है। इससे आईआईटी की वर्ल्ड क्लास रैंकिंग भी प्रभावित हो सकती है। केवल कटऑफ में गिरावट करने तथा क्वालिफाई विद्यार्थियों की संख्या बढाए जाने से रिक्त सीटें नहीं भर सकती हैं। इसके लिए आईआईटी संस्थानों की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा।