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भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां: रोचक तथ्य, श्रेणियां और उपलब्धियां यहां जानिए

Wed, 10 Mar 2021 07:15 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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भारतीय नौसेना - फोटो : अमर उजाला
भारतीय नौसेना में 10 मार्च, 2021 को एक और पनडुब्बी आईएनएस करंज कमीशन की गई। यह भारतीय नौसेना की ऐसी तीसरी पनडुब्बी है जो परमाणु हमला करने में सक्षम है। आईएनएस करंज भारतीय नौसेना के कलवरी प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित छह स्कोर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में से एक है। इस श्रेणी की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर, 2017 को कमीशन किया गया था। इसके बाद आईएनएस खंडेरी  28 सितंबर, 2019 को कमीशन किया गया था। गौरतलब है कि देश की सुरक्षा योजना को ध्यान में रखते हुए स्कोर्पीन कलवरी श्रेणी में छह पनडुब्बियों को शामिल किया जाना हैं। इनमें से तीन को कमीशन मिल चुका है। जबकि तीन पनडुब्बियों की कमीशनिंग होना बाकी है। इस श्रेणी की दो अन्य पनडुब्बियां आईएनएस वेला 06 मई, 2019 और वागीर 12 नवंबर, 2020 को लॉन्च हो चुकी हैं। लेकिन इन्हें अभी नौसेना में शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब ऐसा नहीं है कि भारतीय नौसेना के पास अभी सिर्फ तीन ही पनडुब्बियां हैं। दरअसल, यह तीन पनडुब्बियां स्कोर्पीन कलवरी श्रेणी की है। नौसेना के पास बाकी कईं अन्य श्रेणियों की भी पनडुब्बियां हैं। तो आइए जानते हैं भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों और उनकी विभिन्न श्रेणियों और रिकॉर्ड्स के बारे में रोचक जानकारी ... 
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indian navy
नौसेना की पनडुब्बी शाखा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य 
  • पनडुब्बियों की शाखा के अग्रणी- पनडुब्बियों के प्रथम समूह के प्रशिक्षुओं को 1962 में एचएमएस डॉल्फिन में प्रशिक्षण दिया गया।
  • कमीशन की जाने वाली पहली भारतीय पनडुब्बी आईएनएस कलवरी है। इसे 08 दिसंबर, 1967 कमांडर केएस सुब्रह्मणियम के अधीन कमीशन किया गया था। 
  • 1971  के युद्ध में भाग लेने वाली तीन पनडुब्बियों में कमांडर वीएस शेखावत के अधीन आईएनएस करंज, कमांडर ए ऑदित्तो के अधीन आईएनएस कुरसुरा और कमांडर रॉय मिलन के अधीन आईएनएस खंडेरी थी।
  • सिंधुघोष वर्ग की पहली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुघोष 30 अप्रैल, 1986 को कमांडर केसी वर्गीस के अधीन कमीशन किया गया।
  • एसएसके यानी शिशुमार वर्ग की पहली पनडुब्बी आईएनएस शिशुमार को 22 सितंबर, 1986 को कमांडर पीएम भाटे के अधीन कमीशन किया गया।
  • भारतीय नौसेना के ध्वज के तहत नाभिकीय शक्ति वाली पहली पनडुब्बी आईएनएस चक्र का प्रचालन जनवरी 1988 से जनवरी 1991 के बीच  कैप्टन आरएन गणेश के अधीन किया गया।
  • पहली स्वदेशी एसएसके यानी शिशुमार वर्ग की पनडुब्बी आईएनएस शाल्की का निर्माण कमांडर केएन सुशील के अधीन एमडीएल (एमबी) में 06 फरवरी, 1992 को पूरा किया गया था।
  • मिसाइल युक्त पहली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुशस्त्र 19 जुलाई, 2000 को कमांडर आर सरीन के अधीन कमीशन की गई।
  • पहली सबमरीन मिसाइल आईएनएस सिंधुशस्त्र 22 जून, 2000 को रूसी द्वीप से लॉन्च किया गया। 
  • पनडुब्बी कमीशनिंग पहला सबमरीन बेस आईएनएस वीरबाहु को 19 मई, 1971 को कमांडर केएस सुब्रह्मणियम के अधीन कमीशन किया गया था। 
  • देश के पहले पनडुब्बी प्रशिक्षण प्रतिष्ठान आईएनएस सातवाहन को 21 दिसंबर 1974 को कमांडर केएन दुबाश के अधीन कमीशन किया गया था।
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आईएनएस करंज - फोटो : ANI
इनके नाम ये हैं पहले रिकॉर्ड 
  • कमांडर एमएन सामंत महावीर चक्र पुरस्कार पाने वाले पहले पनडुब्बी चालक थे।
  • कमांडर वीएस शेखावत वीर चक्र पुरस्कार पाने वाले पहले पनडुब्बी चालक थे।
  • एडमिरल वीएस शेखावत ने पनडुब्बी शाखा से देश का पहला नौसेना प्रमुख बनने का गौरव प्राप्त किया। 
  • कैप्टन बीके डांग 06 जनवरी, 1966 को पनडुब्बी हथियार शाखा के पहले निदेशक (डीएसए) बने थे।
  • कमांडर बीएस उप्पल 01 जुलाई, 1986 को भारतीय नौसेना के पहले पनडुब्बी प्रचालन के निदेशक (डीएसओ) बने थे।
  • रियर एडमिरल ए ऑदित्तो 01 अप्रैल, 1987 को भारतीय नौसेना के पहले फ्लैग ऑफिसर-पनडुब्बी बने थे। 
  • रियर एडमिरल एके सिंह 14 अक्तूबर, 1996 को पहले सहायक नौसेना प्रमुख-सबमरीन बने थे। 
  • कैप्टन आरएन गणेश नाभिकीय पनडुब्बी आईएनएस चक्र के प्रथम नियंत्रक और चालक थे। 
  • पनडुब्बी चालक रहे कैप्टन आरएन गणेश के नाम नौसेना के पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के नियंत्रक और चालक होने का भी रिकॉर्ड है।

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INS Arihant - फोटो : Social Media
देश की पहली पनडुब्बी आईएनएस कुरसुरा, जो अब बन गई संग्रहालय 
कमांडर ए. ऑदित्तो के आदेश के तहत 18 दिसंबर, 1969 को आईएनएस कुरसुरा रीगा को पूर्व सोवियत संघ (अब रूस) में कमीशन किया गया था। इस पनडुब्बी ने 20 फरवरी, 1970 को बालरिस्क से अपने मार्ग पर आगे बढ़ना शुरू किया। भारतीय नौसेना में कुरसुरा के कमीशन से इसके तीसरे आयाम की वृद्धि देखी गई। यह भारतीय नौसेना पनडुब्बी शाखा की नींव का पत्थर थी। आईएनएस कुरसुरा को 27 फरवरी, 2001 को डिकमीशन किया गया था। इसके बाद यह संग्रहालय में तब्दील कर दी गई।
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आईएनएस करंज - फोटो : ANI
भारत-पाक युद्ध में अहम योगदान 
आईएनएस कुरसुरा ने 1971 के भारत - पाक युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई था। इस पनडुब्बी ने अपनी अग्रणी यात्राओं और दूसरे देशों में ध्वज दर्शन के मिशन के माध्यम से सद्भावना और सौहार्द का विस्तार किया था। अपने लंबे सफर में, आईएनएस कुरसुरा के 13 बार चालक बदले थे। कमांडर केएम श्रीधरन इसके अंतिम कमांडिंग अधिकारी रहे हैं। अपनी सेवा के 31 गौरवशाली वर्षों के दौरान इस पनडुब्बी ने 73,500 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए लगभग सभी प्रकार के नौसेना संचालन में भाग लिया। 
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Submarine Museum INS Kursura - फोटो : Indian Navy
2002 से सेवा में पनडुब्बी संग्रहालय
आईएनएस कुरसुरा की डिकमीशन के बाद इस पनडुब्बी को विशाखापत्तनम में स्थित आरके समुद्रतट पर एक पनडुब्बी संग्रहालय में बदला गया है। इस संग्रहालय का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा 09 अगस्त, 2002 को किया गया और 24 अगस्त, 2002 को इसे जनता के लिए खोला गया।
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Indian Navy Submarine : INS Sindhughosh - फोटो : social media
सिंधुघोष श्रेणी
सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां कीलो श्रेणी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। इसे 877 ईकेएम नाम से निर्दिष्ट किया गया है तथा इसका निर्माण रूसी रक्षा निर्यात कंपनी रोसवोरुझेनी और रक्षा मंत्रालय (भारत) के बीच एक अनुबंध के तहत किया गया था। 3,000 टन भार वाली इस श्रेणी की पनडुब्बियों में अधिकतम 300 मीटर की गहराई तक गोता लगाने तथा 18 समुद्री मील की गति से चलने की क्षमता है। सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां प्रशिक्षित चालक दल के 53 सदस्यों के साथ 45 दिनों तक निरंतर संचालन में सक्षम हैं। इस श्रेणी की प्रमुख पनडुब्बियां निम्नानुसार हैं ...
नाम पताका संख्या कमीशन तिथि
सिंधुघोष एस 55 30 अप्रैल, 1986
सिंधुध्वज एस 56 12 जून, 1987
सिंधुराज एस 57 20 अक्तूबर, 1987
सिंधुवीर एस 58 26 अगस्त, 1988
सिंधुरत्न एस 59 22 दिसंबर, 1988
सिंधुकेशरी एस 60 16 फरवरी, 1989
सिंधुकीर्ति एस 61 04 जनवरी, 1990
सिंधुविजय एस 62 08 मार्च, 1991
सिंधुरक्षक एस 63 24 दिसंबर, 1997
सिंधुशस्त्र एस 65 19 जुलाई, 2000

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Indian Navy Submarine : INS Shishumar - फोटो : social media
शिशुमार श्रेणी
शिशुमार श्रेणी के पोत (1500 प्रकार) की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। इन पनडुब्बियों को जर्मन कंपनी एचडीडब्लू के साथ अनुबंध विकसित किया गया है। पहली दो पनडुब्बियों को काइल एचडीडब्लू द्वारा बनाया गया था, जबकि शेष का निर्माण मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई में किया गया है। पनडुब्बियों को 1986 और 1994 के बीच नौसेना में कमीशन किया गया था। इस श्रेणी की पनडुब्बी 1660 टन के वजन की होती हैं। इनकी रफ्तार क्षमता 22 समुद्री मील की गति यानी 41 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इन पनडुब्बियों पर प्रशिक्षित चालक दल के 40 सदस्य तथा आठ अधिकारियों का दल रहता है। शिशुमार श्रेणी की पनडुब्बियों में आईकेएल - डिजाइन इस्केप प्रणाली का प्रावधान किया गया है।
 
नाम पताका संख्या कमीशन तिथि
शिशुमार एस 44 22 सितंबर, 1986
शंकुश एस 45 20 नवंबर, 1986
शालकी एस 46 07 फरवरी, 1992
शंकुल एस 47 28 मई, 1994

 

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आईएनएस खंडेरी - फोटो : PTI
कलवरी श्रेणी 
कलवरी प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित छह स्कोर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में से एक है। इस श्रेणी की प्रमुख पनडुब्बियां निम्नानुसार हैं ...
नाम पताका संख्या लांन्च तिथि कमीशन तिथि
कलवरी एस 21 27 अक्तूबर, 2015 14 दिसंबर, 2017
खंडेरी एस 22 12 जनवरी, 2017 28 सितंबर, 2019
करंज एस 23 31 जनवरी, 2018 10 मार्च, 2021
वेला एस 24 06 मई, 2019 -
वागीर एस 25 12 नवंबर, 2020 -
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Indian Navy Submarine : INS Chakra - फोटो : social media
चक्र श्रेणी
भारतीय नौसेना पोत प्रोजेक्ट चक्र के तहत अकुला श्रेणी की फिलहाल एक ही पनडुब्बी है। यह पनडुब्बी 8,140 टन वजनी है। यह परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी है। आईएनएस चक्र को 04 अप्रैल, 2012 में आधिकारिक तौर पर नौसेना में कमीशन किया गया था। इस पनडुब्बी के पैनेट नंबर यानी पताका संख्या एस 71 है।
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