फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Communication: अपने विचारों की ताकत दिखाएं, केवल सोचने से नहीं; सही ढंग से व्यक्त करने से ही होता है असर

Fri, 22 Aug 2025 04:43 PM IST
शाहीन परवीन एंड्रिया बेल्क ओल्सन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Effective Expression: शानदार विचार होना अच्छा है, लेकिन उन्हें सही तरीके से साझा करना ही उन्हें असरदार बनाता है। केवल सोचने या बोलने से काम नहीं चलता। सही अभिव्यक्ति से ही आपके विचार लोगों तक पहुंचते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Thought Leadership: बचपन में हम सबने टेलीफोन वाला खेल तो खेला ही होगा, जिसमें एक वाक्य कानों-ही-कानों घूमता हुआ जब आखिरी व्यक्ति तक पहुंचता है, तो वह अपने मूल विचार से बिल्कुल अलग हो चुका होता है। आजकल यही हाल पेशेवर जीवन और संगठनों में भी चल रहा है। कई बार आप बड़ी लगन और मेहनत से किसी प्रेजेंटेशन या प्रोजेक्ट की योजना बनाते हैं, लेकिन अपने क्रियान्वयन स्तर तक पहुंचते-पहुंचते उसका असर फीका पड़ जाता है। 

इससे न सिर्फ निराशा होती है, बल्कि सफलता की राह भी मुश्किल हो जाती है। ऐसा बातचीत में तालमेल न होने के कारण होता है, जिसे अक्सर संचार में लीक पॉइंट्स कहते हैं। इससे छुटकारा पाना जरूरी है, क्योंकि जब कोई विचार अंत तक बिना किसी बदलाव के पहुंचता है, तो संवाद भी बेहतर होता है और तरक्की भी सुनिश्चित होती है। आइए जानते हैं कि ऐसा होता क्यों है और इसके बचने के तरीके क्या हैं।
विज्ञापन

2 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विचारों का दस्तावेजीकरण

दिमाग किसी भी विचार को काफी विस्तृत रूप से देखता है, जिसमें उसकी गहराई, निहितार्थ व बारीक जोड़-तोड़ शामिल होते हैं। अक्सर आप अपने मस्तिष्क में मौजूद विचारों को शब्दों, खासकर दस्तावेज के रूप में व्यक्त करते हैं। यहीं पहला लीक पॉइंट होता है, जहां आपकी नवाचारी सोच साधारण और दैनिक बातचीत में तब्दील हो जाती है। 

इससे बचने के लिए ऐसा वातावरण तैयार कीजिए, जहां आप अपने विचारों के सभी पहलुओं पर सहजता से अन्य लोगों से बातचीत कर सकें। आप चाहें तो इसके लिए भौतिक या आभासी मंच भी तैयार कर सकते हैं, जहां सोच के सभी पहलू आपस में जुड़ सकें।
विज्ञापन

3 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

प्रेजेंटेशन से पहले की तैयारी

एक बार जब आप अपने विचारों को दस्तावेज के रूप में समेट लेते हैं, तो उसके प्रेजेंटेशन तक का सफर अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब आप अपने विचारों को शब्दों में बदलते हैं और फिर उन्हें दूसरों के सामने प्रस्तुत करते हैं, तो उसके अर्थ में बदलाव आ जाता है। इसलिए, आप जो भी कहना चाहते हैं, उसकी स्पष्टता की जांच प्रेजेंटेशन से पहले जरूर कर लें। 

4 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
फिर पांच ऐसे सहकर्मियों को चुनें, जिन्हें आपकी योजना की जानकारी न हो। अपना संदेश उनके सामने रखें और उन्हें क्रमवार एक-दूसरे को समझाने के लिए कहें। इस प्रक्रिया में देखें कि अंतिम व्यक्ति तक कौन-से तथ्य बरकरार रहते हैं और कौन-सी बात आखिर तक नहीं पहुंच पाती है। हर किसी तक पहुंचने वाले तत्वों के इर्द-गिर्द ही अपनी प्रेजेंटेशन तैयार करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

संतुष्टि है जरूरी

सबसे खतरनाक और पेचीदा लीक पॉइंट तो प्रेजेंटेशन में पहुंचने के बाद देखने को मिलती है, जहां आप अपनी बात रखते हैं। जरूरी नहीं कि आप जो कह रहे हैं, हमेशा वैसा ही समझा जाए। इसलिए, यह मानने की गलती न करें कि आपकी बात पूरी तरह से मीटिंग में मौजूद सभी लोगों के समझ में आ गई है। वहां मौजूद सभी लोगों से पूछें कि उन्होंने मुख्य संदेश क्या समझा। मिले फीडबैक पर काम करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें