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Leadership: लीडर्स के लिए जरूरी, बदलते माहौल में चुनौतियों को अवसर में बदलना सीखें; जानें रणनीति

Sat, 04 Oct 2025 04:11 PM IST
शाहीन परवीन केटी बेस्ट, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Professional Growth: आज के बदलते माहौल में लीडर्स के लिए सबसे बड़ी जरूरत है खुद को स्थिर रखना और चुनौतियों को अवसर में बदलने की कला सीखना। खुद का मार्गदर्शक बनना ही सफलता की कुंजी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Strategic Planning: आज का नेतृत्व चुनौतियों से भरा हुआ है। तेजी से बदलता परिवेश, लगातार बढ़ती अनिश्चितताएं और लोगों की ऊंची अपेक्षाएं नेतृत्वकर्ता को हर पल परखती हैं। ऐसे समय में सेल्फ-कोचिंग यानी अपना कोच खुद बनना, सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।

यह पेशेवरों, खासकर नेतृत्व करने वालों के लिए एक अनिवार्य कौशल है। यह कौशल लीडर को संकट की घड़ी में भी शांत रहना और थोड़ा रुककर परिस्थितियों पर विचार करने के साथ कदम उठाना सिखाता है। इस लेख में हम इसी अहम कमी को समझेंगे और जानेंगे कि इसे कैसे पूरा किया जा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

सीधे मुद्दे पर रहें केंद्रित 

किसी भी समस्या को सुलझाने का सबसे कारगर तरीका है उसे बेहद सरल और स्पष्ट शब्दों में सामने रखना। कोशिश करें कि समस्या को सिर्फ दो छोटे वाक्यों में लिखें-जैसे कि समस्या एक्स है, और इसका वाई प्रभाव पड़ रहा है। ऐसा करने से आपका ध्यान सीधे मुद्दे पर केंद्रित रहता है।

हर समस्या को अलग-अलग लिखना जरूरी है, लेकिन याद रखें समाधान देने की जल्दबाजी न करें, जैसे-'मैं अच्छा नेतृत्व नहीं कर रहा हूं।' कहने से बेहतर है कहें कि 'मैं अपनी कुशल टीम के सदस्य को फीडबैक देने से बच रहा हूं और इसका असर पूरी टीम पर पड़ रहा है।' यह तरीका ज्यादा असरदार है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

गंभीर चिंतन से सटीक समाधान

जब आपको यह महसूस हो कि अब आप समस्या की जड़ तक पहुंच चुके हैं, तब आप गहराई में जाकर उससे जुड़ी जानकारी इकट्ठा करें। इसके लिए जरूरी है कि आप व्यवहार के पैटर्न पर ध्यान दें, हाल के प्रदर्शन से जुड़े डाटा का विश्लेषण करें, सहकर्मियों से ईमानदार फीडबैक लें और अपनी सोच को खुलकर परखें। याद रखें, जितनी सटीक और ठोस आपकी समझ होगी, उतना ही प्रभावी और टिकाऊ आपका समाधान बनेगा।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

दृष्टिकोण को व्यापक बनाएं

यह वह चरण है, जहां आप अपनी समस्या का ठोस समाधान गढ़ते हैं। यह व्यावहारिक होने के साथ ही आपकी टीम और संगठन की जरूरतों के अनुरूप भी होना चाहिए। इसके लिए खुद से सवाल पूछें कि क्या यह तरीका काम करेगा? क्या मुझे पहले इसकी जांच कर लेनी चाहिए? क्या यह समस्या की असली जड़ को खत्म कर सकता है? इन सवालों से आपका दृष्टिकोण और स्पष्ट होता है।
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सुधार की जरूरत को समझें

सवालों के जवाब खोज लेने के बाद अपनी बनाई रणनीति को अमल में लाएं। अक्सर लोग आत्मविश्वास में इसे आसान मान लेते हैं, लेकिन वास्तविकता में कई बार अप्रत्याशित स्थितियां सामने आती हैं। इसलिए इस दौर में समझदारी यही है कि आप सतर्क रहें, पहचानें कि कौन-सी चीजें स्थायी रूप से काम कर रही हैं और किन में तुरंत सुधार या बदलाव की जरूरत है।
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