क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) छात्रों की रचनात्मकता को खत्म कर रहा है? इस सवाल का जवाब शनिवार को 'अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025' कॉन्क्लेव में मिला। 'टीचर्स 2.0' सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एआई छात्रों को 'डंप' (सुस्त) नहीं, बल्कि स्मार्ट बना रहा है।
लोटस वैली स्कूल की प्रिंसिपल इंदु यादव ने रट्टा मारने की प्रवृत्ति को खारिज करते हुए कहा कि हम ऐसे विद्यार्थियों की तलाश करते हैं, जो सच में इनोवेशन और डिस्कवर करना चाहते हैं। विद्यार्थियों को किताबों को रटने पर नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट पर फोकस करना चाहिए।
तकनीक की भूमिका पर उन्होंने कहा कि जेमिनी (Gemini) जैसी तकनीक बच्चों की रचनात्मकता (Creativity) को किल नहीं, बल्कि उसे और बढ़ा रही है। सबकी क्षमताएं अलग-अलग होती हैं, इसलिए हम तकनीक का उपयोग करके उन्हें गहराई से जानते हैं और उनका अनुभव बढ़ाने के लिए असेसमेंट टेस्ट कराते हैं।