संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने 17 नवंबर, 1965 को 8 सितंबर का दिन विश्व साक्षरता दिवस के लिए निर्धारित किया था। 1966 में पहला अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर हम कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी दे रहे है जिसे जानना आपके लिए जरूरी है।
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UNESCO की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व की 84 प्रतिशत जनसंख्या शिक्षित है। वैश्विक स्तर पर, कम से कम 750 मिलियन युवा और वयस्क अभी भी पढ़ नहीं सकते हैं। 250 मिलियन बच्चे अब भी बुनियादी शिक्षा हासिल करने में असमर्थ हैं।
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युवा साक्षरता के राष्ट्रीय आंकलन के मुताबिक अमेरिका के 50 प्रतिशत युवा 8वीं कक्षा के स्तर की किताबें पढ़ने में भी असमर्थ हैं और 3.2 करोड़ अमेरिकी युवा पूरी तरह अनपढ़ हैं।
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UNESCO
UNESCO की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक युवा साक्षरता दर 1990 में 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। अब ये आंकड़ा लगभग 91 प्रतिशत है। इसके पीछे स्कूली शिक्षा में बढ़ोतरी अहम कारण है।
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2005-2014 के बीच 758 मिलियन (15 से 24 साल) वयस्क ऐसे थे जो साधारण वाक्य पढ़ने में भी असमर्थ थे। इनमें दो तिहाई महिलाएं शामिल हैं।
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UNESCO
2005 से 2015 के बीच 26 देश ऐसे थे जिनके स्कूलों का इस्तेमाल केवल मिलिट्री उद्देश्य से किया गया। एक अनुमान के मुताबिक साल 2015 में 25,000 स्कॉलरशिप विकासशील देशों में छात्रों को दी गई।
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1.8 मिलियन जनसंख्या के साथ गाम्बिया दुनिया का सबसे अशिक्षित देश है। यहां 65.5 प्रतिशत लोग लिख पढ़ नहीं सकते।
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भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अशिक्षित है। देश में 28.7 करोड़ अशिक्षित वयस्क हैं जो दुनिया के कुल अशिक्षितों के 37 प्रतिशत हैं।
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भारत में 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 बनाया गया है। इस कानून को पूरे देश में अप्रैल 2010 से लागू किया गया।
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सबसे ज्यादा शिक्षित देश में रूस पहले स्थान पर है। पाकिस्तान की लगभग आधी जनसंख्या अशिक्षित है।